*बादल परिवार को बचाने की बजाय, एसजीपीसी को 328 सरूपों के लापता होने के मामले में एसआईटी का सहयोग करना चाहिए: बलतेज पन्नू*

Jan2,2026 | Jagrati Lahar Bureau | Chandigarh


*एसजीपीसी की ओर से पेश हो रहा वकील ही 328 सरूप मामले के मुख्य आरोपी का बचाव कर रहा है, यह सीधे तौर पर हितों का टकराव है: बलतेज पन्नू*

 *मुख्य आरोपी को सुखबीर बादल के निजी चैनल के पत्रकार के नाम पर बुक किए गए होटल के कमरे से गिरफ्तार किया गया था, इस व्यक्ति को कौन बचा रहा है?: बलतेज पन्नू*

 *इंसाफ को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, सिख संगत जवाब की हकदार है, एसजीपीसी अभी तक गुरु साहिब के लापता सरूपों का पता नहीं लगा सकी: पन्नू*

 *बादल परिवार के सीए एस.एस. कोहली को इतनी आक्रामकता से क्यों बचाया जा रहा है, वह ऐसा क्या जानता है जो एसजीपीसी और बादल छुपाना चाहते हैं?: बलतेज पन्नू*

 

आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 सरूपों के लापता होने के गंभीर और बेहद संवेदनशील मुद्दे पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और इसके अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को घेरते हुए उन पर प्रभावशाली व्यक्तियों को जानबूझकर बचाने, हितों के टकराव और इंसाफ को भटकाने की बार-बार कोशिश करने के आरोप लगाए।

 

शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि जहां एसजीपीसी अध्यक्ष धामी दावा कर रहे हैं कि यह कार्रवाई "सिख मामलों में दखलअंदाजी" है, वहीं समूची सिख कौम जानती है कि यह मामला एसआईटी के पास सिर्फ इसकी गंभीरता और एसजीपीसी की ओर से ईमानदारी व पारदर्शिता से कार्रवाई करने में असफल रहने के कारण पहुंचा है।

 

पन्नू ने याद दिलाया कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी और मामले का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि जांच सरकार द्वारा कराई जाए। अदालत के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की गई, काबिल अधिकारियों की भागीदारी वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया और अब पहली गिरफ्तारी हो चुकी है।

 

उन्होंने खुलासा किया कि गिरफ्तार किया गया आरोपी सतिंदर सिंह कोहली (एस.एस. कोहली) एक चार्टर्ड अकाउंटेंट है, जिसने न सिर्फ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के लिए काम किया है, बल्कि वह बादल परिवार का सीए भी रहा है और उनके कारोबारों को संभालता रहा है। पन्नू ने कहा कि सिर्फ यही तथ्य कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

वित्तीय अनियमितताओं के बारे में बलतेज पन्नू ने पूर्व अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह जी द्वारा जारी स्पष्टीकरण का हवाला दिया, जिन्होंने कहा था कि उन्होंने आदेश दिया था कि एस.एस. कोहली से जुड़ी फर्म को दिए गए पैसों का 75% हिस्सा वसूल किया जाए और वापस जमा कराया जाए। पन्नू ने इशारा किया कि आज तक वह पैसा एसजीपीसी के खाते में वापस जमा नहीं हुआ है। जबकि वह दावा कर रही है कि उसने मामला सिख गुरुद्वारा जुडिशियल कमीशन के पास ले जाया है।

 

पन्नू ने हितों के टकराव का एक अहम सवाल उठाया और कहा कि वही वकील, एडवोकेट सियालका, पैसों की वसूली के लिए एसजीपीसी की तरफ से पेश हो रहे हैं और साथ ही 328 सरूपों के मामले में आरोपी एस.एस. कोहली के बचाव पक्ष के वकील के तौर पर भी पेश हो रहे हैं।

 

उन्होंने सवाल किया कि क्या यह सीधे तौर पर हितों का टकराव नहीं है, या क्या यह जानबूझकर किया गया है? कोई एक वकील पैसों की वसूली के लिए एसजीपीसी का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकता है और उसी समय श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 सरूपों के गायब होने के आरोपी का बचाव कैसे कर सकता है?

 

ज्ञानी हरप्रीत सिंह जी के बयान का और हवाला देते हुए पन्नू ने कहा कि पूर्व जत्थेदार ने स्पष्ट किया था कि कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई थी, लेकिन एक हफ्ते के अंदर ही एसजीपीसी ने अपना प्रस्ताव बदल दिया और फैसला किया कि कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी, सिर्फ इसलिए क्योंकि एस.एस. कोहली का नाम सामने आया था। उन्होंने कहा कि अगर ईशर सिंह रिपोर्ट में कोहली का नाम न आता तो कानूनी कार्रवाई तुरंत शुरू कर दी जानी थी।

 

पन्नू ने यह भी बताया कि सुखबीर बादल के निजी चैनल के एक पत्रकार के नाम पर एक होटल में कमरा बुक किया गया था, जहां से एस.एस. कोहली को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि यह सीधा सवाल खड़ा करता है कि इस व्यक्ति को कौन बचा रहा है?

 

धामी के इस दावे पर सख्त एतराज जताते हुए कि यह मुद्दा सिख मामलों में दखलअंदाजी है, पन्नू ने कहा कि जब कल गुरसिखों और विभिन्न सिख संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, क्या वे सिख नहीं हैं? क्या वे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में विश्वास नहीं रखते?

 

उन्होंने कहा कि सच्चाई और असलियत संगत और पूरी दुनिया के सामने आनी चाहिए। बलतेज पन्नू ने श्री अकाल तख्त साहिब के तत्कालीन कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह जी द्वारा दिए गए स्पष्ट लिखित निर्देशों और समय सीमा के बावजूद एसजीपीसी की ओर से अपना सैटेलाइट टीवी चैनल शुरू करने में असफल रहने का मुद्दा भी उठाया।

 

उन्होंने कहा कि एसजीपीसी ने अपना चैनल इसलिए लॉन्च नहीं किया क्योंकि बादल परिवार की मल्कियत वाले एक निजी चैनल पर लाइव टेलीकास्ट जारी है। इसकी बजाय, एसजीपीसी ने सिर्फ एक यूट्यूब चैनल बनाया और उस पर 'एसजीपीसी' लिख दिया, जबकि जत्थेदार के एक 'फ्री-टू-एयर' सैटेलाइट चैनल लॉन्च करने के स्पष्ट निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया, ताकि गुरबाणी के ऑडियो और वीडियो को सभी चैनलों द्वारा मुफ्त में प्रसारित किया जा सके और किसी का एकाधिकार न रहे।

 

पन्नू ने कहा कि कार्यकारी जत्थेदार के आदेशों का पालन इसलिए नहीं किया गया क्योंकि मुनाफा सिर्फ एक चैनल द्वारा कमाया जा रहा था। उन्होंने आगे कहा कि सब कुछ एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसे बचाया जा रहा है ताकि उनका कारोबार जारी रहे और बड़े पैमाने पर बढ़े।

 

पन्नू ने आगे आरोप लगाया कि एक व्यक्ति को बचाने के लिए ईशर सिंह रिपोर्ट के आधार पर तैयार किए गए प्रस्ताव को, जिसमें दोषियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई थी, जानबूझकर एक और प्रस्ताव पास करके रद्द कर दिया गया था कि कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसमें एस.एस. कोहली का नाम शामिल था।

 

उन्होंने चेतावनी दी कि एक व्यक्ति को इतनी आक्रामकता से क्यों बचाया जा रहा है? वह कौन से राज जानता है? किन होटलों में क्या-क्या हुआ, क्या प्रबंध किए गए, आने वाले दिनों में और खुलासे होने की उम्मीद है।

 

बलतेज पन्नू ने एसजीपीसी अध्यक्ष धामी से एसआईटी को पूरा सहयोग देने की अपील की, जिसने एक आरोपी को गिरफ्तार करके पहले ही बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी को सहयोग करना चाहिए ताकि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 लापता सरूपों के बारे में सच्चाई सामने आ सके कि वे कहां हैं और कौन जिम्मेदार है।

 

उन्होंने मौजूदा जत्थेदार द्वारा जारी लिखित आदेशों का भी हवाला दिया, जिसमें एसजीपीसी को अपने स्टाफ और संसाधनों का उपयोग लापता सरूपों का पता लगाने के लिए करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में साबित करता है कि 328 सरूपों के ठिकाने के बारे में अभी भी कुछ पता नहीं है।

 

पन्नू ने कहा कि जहां धामी साहब बार-बार कह रहे हैं कि मामला पहले ही सुलझ गया था और यह सिर्फ गिनती की गलती थी, वहीं जत्थेदार साहब का लिखित आदेश स्पष्ट तौर पर कुछ और ही बयान करता है।

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