राजस्थान में हाल में हुए निकाय चुनावों में पार्षदों के निर्वाचन के बाद निकाय प्रमुख चुनने की रणनीति के तहत हिमाचल ले जाए गए कांग्रेस पार्षदों को हरियाणा पुलिस द्वारा पिंजर मे रोका गया।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को रोकना बेहद गंभीर मामला है और इससे पुलिस प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की कि प्रशासन तत्काल स्पष्ट करे कि पार्षदों को किस कानूनी प्रावधान के तहत रोका गया और उन्हें थाने में रखने का आधार क्या है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस को मिली जानकारी के अनुसार राजस्थान के कुछ निर्वाचित पार्षद हिमाचल प्रदेश से राजस्थान लौट रहे थे। आरोप है कि पिंजौर थाना क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों एवं अन्य लोगों ने उनके वाहनों का पीछा किया और उन्हें रोककर थाने में बैठा दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक या वैधानिक मामला है तो पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करे, लेकिन चुनाव से ठीक पहले निर्वाचित पार्षदों को रोकना और उनकी आवाजाही पर प्रतिबंध लगाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला गंभीर कदम है।
राव नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सत्ता के बल पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई भाजपा के तानाशाहीपूर्ण और सत्ता के दुरुपयोग वाले रवैये की ओर इशारा करती है। लोकतंत्र में सरकारें पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए नहीं कर सकतीं।
उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को बिना भय, दबाव या हस्तक्षेप के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। यदि किसी पार्षद के खिलाफ कोई मामला है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और कानून के तहत पारदर्शी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन चुनाव के ठीक पहले पार्षदों को रोककर रखने की कार्रवाई का प्रशासन को स्पष्ट जवाब देना होगा।राव नरेंद्र सिंह ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि पार्षदों को रोकने के आदेश किस स्तर से जारी हुए। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई कानून सम्मत है तो प्रशासन उसके कानूनी आधार को सार्वजनिक करे और यदि किसी अधिकारी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने का नाम नहीं है, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने की गारंटी देना भी उतना ही आवश्यक है। भाजपा सरकार को यह समझना चाहिए कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाएं स्थायी होती हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार और कथित तानाशाहीपूर्ण रवैये से लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी।उन्होंने हरियाणा पुलिस और प्रशासन से पूरे मामले में निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानून के शासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा राजस्थान के निर्वाचित पार्षदों के संबंध में तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।