-देश भर के एक्यूपंचर चिकित्सकों ने भरपूर स्वागत करते हुए पीएम मोदी व स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का आभार जताया
-जल्द ही एक्यूपंचर कौंसिल कौंसिल बनने के रास्ते हुए साफ, एक्यूपंचर डिप्लोमा व डिग्री कालेज खुलेंगे
एक्यूपंचर चिकित्सा पद्धति को भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आखिरकार मान्याता दे दी गई है। यह मान्यता भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन नंबर 3880 तिथि 26 सितंबर, 2024 के माध्यम से दी गई। जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि नेशनल कमीशन फार एलाइड साइंस के तहत लोगों की हेल्थ केयर के लिए काफी लाभदायक होगा।
इस नोटिफिकेशन के बाद अब एक्यूपंचर प्रोफेशनल को न केवल कानूनी तौर पर प्रैक्टिस करने का अधिकार हासिल होगा। बल्कि एक्यूपंचर के पूर्ण विकास के लिए डिप्लोमा व डिग्री कालेज खुलने का रास्ता भी साफ हो गया है। यह उल्लेखनीय है कि एक्यूपंचर चिकित्सा पद्धति को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 1979 में मान्यता दी गई थी। इस बारे में और अधिक जानकारी देते हुए डा. इंद्रजीत सिंह ढींगरा, डा. रमन कपूर व डा. अनिश गुप्ता ने भारत सरकार के स्वास्थय मंत्री श्री जेपी नड्डा व लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जी का आभार प्रकट किया जिनके सहयोग से हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के रिवायती चिकित्सा पद्धतियों द्वारा भारत की जनता को अच्छा व सस्ता इलाज मुहय्या करवाने के लिए एक्यूपंचर एक अहम भूमिका निभा सकता है। डा. सिहं ने बताया कि इससे पहले 1996 में वेस्ट बंगाल व 2017 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा पूर्ण रूप से एक्यूपंचर इलाज प्रणाली को मान्यता दी जा चुकी है। डा. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि उन्हें 2023 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मनीला में हुई इंटरनेशनल कांफ्रेंस में वर्ल्ड फेडरेशन आफ एक्यूपंचर सोसायटी के प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला था। इस कांफ्रेंस का मुख्य मकसद साल 2030 तक पूरे विश्व के लोगों के लिए सबके लिए स्वास्थ्य उपलब्ध करवाना था तथा इसी कांफ्रेंस में अन्य रिवायती चिकित्सा प्रणालियों में से पूर्ण रूप से एक्यूपंचर को मुख्य माना गया जोकि उनके उपरोक्त उद्देश्य को पूरा करने में अहम निभा सकता है। इस कांफ्रेंस में लुधियाना के डा. डीएन कोटनीस एक्यूपंचर अस्पताल की पिछले पचास साल की प्राप्तियों के माध्यम एक्यूपंक्चर के जरिये विश्व भर में लोगों को इलाज दिलाना के दिए प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। अब भारत सरकार द्वारा भी एक्यूपंचर चिकित्सा प्रणाली को स्वीकृति देना एक अहम कदम है। डा. सिंह ने बताया कि इस चिकित्सा पद्धति के जरिये साधारण बीमारियों मासपेशियों व जोड़ों में समस्याएं, डिप्रेशन, माइग्रेन, सांस की तकलीफ, दमा, त्वचा, पाचन प्रक्रिया आदि से लेकर गंभीर बीमारियों अधरंग, पैरालाइसिस, सेरेब्रल पालिसी, मानसिक रोग व नशों की समस्या आदि का इलाज बिना दवा, बिना आपरेशन के किफायती खर्च पर होता है। उन्होंने बताया कि एक्यूपंचर के विकास व प्रसार से भारत सरकार का स्वास्थ्य से संबंधित बजट को बौझ भी कम हो सकेगा।
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Gautam Jalandhari (Editor)