पंचकूला नगर निगम में अनुसूचित जाति वार्ड आरक्षण का मसला हाइकोर्ट में हल
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,11अप्रैल। हरियाणा में अब जल्दी ही पंचकूला, अंबाला और सोनीपत नगर निगम चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। इस मामले में पंचकूला नगर निगम क्षेत्र में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डो की संख्या को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब हाइकोर्ट की अनुमति से हल हो गया है। हाइकोर्ट ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका को स्वीकार करते हुए अनुसूचित जाति के लिए तीन वार्ड आरक्षण की अधिसूचना जारी करने की अनुमति दे दी।
यह विवाद पंजाब और हरियाणा हाइकोर्ट तब पहुंचा जबकि पंचकूला नगर निगम की वार्डबंदी के दौरान अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डो की संख्या चार से घटाकर तीन कर दी गई। आरक्षित वार्ड घटाने को हाइकोर्ट में चुनौती दी गई। इस याचिका को स्वीकार करते हुए हाइकोर्ट ने अनुसूचित जाति के लिए तीन वार्डों के आरक्षण के लिए जारी अधिसूचना रद्द कर दी। हाइकोर्ट के इस फैसले से यह माना गया कि दोबारा वार्डबंदी के लिए निगम चुनाव कुछ समय पीछे चले जाएंगे। लेकिन सरकार ने हाइकोर्ट में इस फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर की और हाइकोर्ट ने यह याचिका मंजूर कर तीन वार्डों के आरक्षण के लिए ही नई अधिसूचना जारी करने की अनुमति दे दी।अब पंचकूला नगर निगम चुनाव को लेकर फिर से 3 अनुसूचित जाति वार्ड आरक्षित करने की अधिसूचना जारी कर दी गई। हाइकोर्ट ने शुक्रवार को आदेश जारी किया कि नई अधिसूचना हरियाणा सरकार जारी कर सकती है।
हरियाणा सरकार ने नई अधिसूचना जारी करते हुए हवाला दिया है कि साल 2011 में हुई जनगणना के अनुसार पंचकूला की आबादी 267413 थी। जिसमें अनुसूचित जाति आबादी की संख्या 41467 थी। जिसके अनुसार अनुसूचित जाति के लिए वार्ड की संख्या 3 बनती है। जिसमें दो अनुसूचित जाति सामान्य व एक अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
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हाईकोर्ट के द्वारा पूरी अधिसूचना रद्द की गई थी। लेकिन सरकार की नई अधिसूचना में जनरल और बीसी वर्ग का जिक्र नहीं है। ऐसे में बीसी व जनरल के लिए अलग से अधिसूचना जारी करनी पड़ेगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो मामला फिर से कोर्ट जा सकता है। याचिकाकर्ताओं ने 4 सितंबर, 2025 की अधिसूचना के खिलाफ याचिका दायर कर दलील दी थी कि पिछले चुनाव में पंचकूला के 20 वार्डों में से 4 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी, इस बार इन्हें घटाकर 3 कर दिया गया। सीटों की संख्या में यह बदलाव 2011 की जनगणना के बजाय फैमिली इंफॉर्मेशन डेटा रिपॉजिटरी के 'ऑन-द-स्पॉट' सर्वे के आधार पर किया गया है। याचिका में कहा गया था कि यह एक स्वैच्छिक योजना है जिसे जनगणना के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनगणना के अनुसार पंचकूला में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 18.1फीसदी थी, जिससे सीटों की संख्या 3.62 यानी 4 बनती है। सरकार के महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि पंचकूला नगर निगम की सीमाओं में बदलाव किया गया है, जिससे कालका और पिंजौर क्षेत्रों को बाहर कर दिया गया। हरियाणा नगर निगम अधिनियम की धारा 6 और परिसीमन नियमों में 2023 में संशोधन किया गया था। इसके तहत सीटों का निर्धारण रिपोजिटरी डेटा के आधार पर करने का प्रावधान जोड़ा गया है।सरकार के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर मौजूदा सीमाओं के भीतर अनुसूचित जाति जनसंख्या केवल 15.51फीसदी (41,467) है, जिससे आरक्षित सीटों की संख्या 3.10 यानी 3 बनती है।