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उपराष्ट्रपति द्वारा शहीदों की स्मृति में विशेष स्मारक डाक टिकट तथा सिक्का जारी

Apr13,2019 | Rahul Soni | AMRITSAR

उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने आज अमृतसर स्थित जालियांवाला बाग़ स्मारक के दर्शन किए तथा मानव इतिहास के जघन्य हत्याकांड की 100 वीं वार्षिकी के अवसर पर अमर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। यह त्रासदी भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद का सबसे रक्तरंजित अध्याय था। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति को स्मारक के पुनरुद्धार, विकास और विस्तार परियोजना की जानकारी भी दी गई। उपराष्ट्रपति ने जालियां वाला बाग़ त्रासदी की 100 वीं वार्षिकी के अवसर पर आयोजित प्रार्थना सभा में भाग भी लिया। उन्होंने इस अवसर पर एक विशेष स्मारक डाक टिकट तथा सिक्का भी जारी किया। श्री नायडू ने अपने ट्वीट में कहा है कि जालियां वाला बाग़ हमें याद दिलाता है कि हमारी आजादी कितने ही बलिदानों की कीमत पर हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि यह अवसर हर उस निर्दोष निस्सहाय भारतीय नागरिक की स्मृति में अश्रुपूर्ण मौन श्रद्धांजलि अर्पित करने का है जिसने 1919 में बैसाखी के इस दिन जालियांवाला बाग हत्याकांड में अपने प्राणों की आहुति दी। यह वेदनापूर्ण अवसर औपनिवेशिक अंग्रेजी हुकूमत की मदांध नृशंसता पर विचार करने का है। सोशल मीडिया के माध्यम से अपने संदेश में उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस अमानवीय त्रासदी के 100 साल बीत जाने के बाद भी, उसकी पीड़ा हर भारतीय आज भी अपने हृदय में महसूस करता है। उन्होंने कहा कि इतिहास घटनाओं का क्रमवार संकलन मात्र नहीं है वह यह भी दिखता है कि लंबे इतिहास में किस प्रकार कुत्सित कुटिल मानसिकता किस हद तक गिर सकती है। इतिहास हमें अपनी गलतियों से सीख लेने के लिए आगाह भी करता है और सिखाता है कि नृशंस अत्याचार की आयु कम ही होती है। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे इतिहास से सीख ले कर, मानवता को एक बेहतर भविष्य देने की दिशा में प्रयास करें। उन्होंने कहा कि विश्व समुदाय विश्व के हर कोने में स्थाई शांति स्थापित करने के लिए साझा प्रयास करे। उन्होंने कहा कि स्कूल से लेकर विश्व के नेताओं की उच्चस्थ शिखर वार्ताओं तक, हर समय और हर स्तर पर, एक स्थाई, सतत और प्रकृति सम्मत विकास ही हमारा अभीष्ट उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना शांतिं के विकास संभव नहीं। उपराष्ट्रपति ने आग्रह किया कि विश्व के देश एक नयी और बराबरी की वैश्विक व्यवस्था स्थापित करें जहां सत्ता, शक्ति तथा उत्तरदायित्व साझा हों, सभी के विचार और अभिव्यक्ति को सम्मानपूर्वक सुना जाए, प्राकृतिक संपदा और धरती के संसाधन भी साझा हों। उन्होंने कहा कि आज का दिन मनुष्य के उस अदम्य साहस की याद दिलाता है जिसने गोलियों के बौछारों के सामने भी शांति और आज़ादी का परचम बुलंद रखा। यह अवसर हमको याद दिलाता है कि हमारी आज़ादी कितने ही बलिदानों की कीमत पर मिली है। उन्होंने कहा कि ' आज उन शहीदों की स्मृति में अश्रुपूर्ण मौन श्रद्धांजलि देने का अवसर है जिन्होंने 1919 में आज ही बैसाखी के दिन अपने प्राणों की आहुति दी थी'। उप राष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि आज का दिन हमें शोषण और दमन से मुक्त विश्व का निर्माण करने की दिशा में प्रयास करने के लिए प्रेरित करेगा। एक ऐसा विश्व जहां मैत्री, शांति और विकास पनपे। जहां सभी राष्ट्र अमानवीय आतंकवाद और हिंसा की शक्तियों के विरुद्ध साझा कार्यवाही करें। आज के दिन हम वसुधैव कुटुंबकम् के भारत के प्राचीन आदर्श के प्रति संकल्प बद्ध हों। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल श्री वीपी सिंह बदनोर, संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री अरूण गोयल तथा केंद्रीय और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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