- Date: 22 Feb, 2019(Friday)
Time:
 logo

जीवन का उद्देश्य इसे पाना नहीं बल्कि इसकी सेवा करना है

Feb10,2019 | Er. Manoj Mehta | ludhiana

ॐ नमो शिवः,ॐ नमो शिवः की आबाज दूर दूर तक शांति को तोड़ रही थी|तभी एका एक तेज रौशनी ने परिबेश बदल दिया|ईश्वर के ध्यान में बैठे अनुराग के कानो में एक अलौकिक आबाज आई " बेटा मांगो,क्या मांगते हो"|अनुराग ने आँखे खोली तो चारो तरफ एक अजब सा प्रकाश फैला था|"मांगो क्या मांगते हो"ईश्वर के शब्दों ने अनुराग की तपस्या का फल दे दिया था|उसने जल्दी से अपने हाथो को ईश्वर की स्तुति में जोड़ दिया|उसकी आँखों में ईश्वर की कृपा की अजब सी चमक थी,चेहरे के भाब ऐसे, की मानो किसी प्यासे को मरुस्थल में पानी की झलक मिल गयी हो|"मांगो बेटा क्या मांगते हो" दिव्या आवाज़ ने अनुराग को फिर कुछ मांगने को कहा|आँखों में प्रेमभाब के आंसू लिए अनुराग बोला "ईश्वर आप मुझे बरदान में" उसने कुछ सोच कर बोला"आप मुझे बरदान दे,की मै दुनिया में सब से अमीर बन जाऊ,सब मुझे जानते हो,मै जहा से निकलू लोग कहे बो जा रहा है अनुराग"चारो तरफ शांति थी|"आप बरदान देंगे न ईश्वर" अनुराग ने उत्सुकता से पूछा|दिव्या आवाज ने अनुराग को जबाब मे कहा"बेटा अपनी आँखे बंद करो"|अभी भी उत्सुकता अनुराग के चेहरे पर डेरा डाले थी,पर अनुराग का ईश्वर पर बिश्बास उसकी उत्सुकता से कही मजबूत था|उसने अपनी आँखे मूद ली और आँखों के पीछे के काले घनेरे शहर मे चला गया|"बेटा आँखे खोलो "ईश्वर ने अनुराग को काली अँधेरी दुनिया से बाहर आने को कहा|अनुराग ने आँखे खोली तो उसके चेहरे पर प्रश्नचिन्ह के भाब थे,बो एक अलग परिबेश मे था,सब कुछ अनदेखा सा था|"प्रभु आप ये मुझे आप कहा ले आये"|चारो तरफ सन्नाटा था,सब कुछ अनजान,अनुराग अभी भी इसे समझने की कोशिश कर रहा था "बेटा ये तुम्हारी दुनिया ही तो है,बस हम समय से कुछ आगे आ गए है "आश्चर्य चकित अनुराग बोला,"पर ईश्वर यहाँ तो कुछ भी मेरी पहचान का नहीं है" बो फिर बोला "कुछ भी नहीं "|ईश्वर कुछ मुस्करा कर बोले"पर बेटा ये तो तुम्हारी ही दुनिया है,जिसे तुम पाना चाहते हो,तुम्हारे लोग, जिन पर तुम अपनी धाक जमाना चाहते हो"अनुराग ईश्वर की बातो को समझने की कोशिश कर रहा था|ईश्वर फिर बोले"ध्यान से, देख कर बोलो, यहाँ क्या है जिस को तुम पहचानते हो "अनुराग ने चारो तरफ नजर घुमा कर देखा और बोला "ईश्वर यहां पर तो सिर्फ आप हो जिसे मै पहचानता हू"|अनुराग घुटनो पर आ गया और हाथ जोड़ कर बोला "ईश्वर मुझे तो बस आप चाहिए,हा ईश्वर,मुझे बरदान मे सिर्फ आप चाहिए"|अनुराग की आँखों से भावबुकता आंसू बन कर बह रही थी|एका एक परिबेश बदल गया|अनुराग के सामने सारी दुनिया थी पर उसकी समझ मे आ गया था की जीवन का उद्देश्य इसे पाना नहीं बल्कि इसकी सेवा करना है|क्योकि बो तो परदे पर चल रहे चलचित्र का एक दृश्य मात्रा है जो अगले पल अपना अस्तित्ब खो देगा |उसे ईश्वर का बरदान मिल चूका था,ज्ञान का,कभी न खोने बाली शान्ति का|

जीवन का उद्देश्य इसे पाना नहीं बल्कि इसकी सेवा करना है 101


जीवन का उद्देश्य इसे पाना नहीं बल्कि इसकी सेवा करना है
जीवन का उद्देश्य इसे पाना नहीं बल्कि इसकी सेवा करन

Comments


About Us


Jagrati Lahar is an English, Hindi and Punjabi language news paper as well as web portal. Since its launch, Jagrati Lahar has created a niche for itself for true and fast reporting among its readers in India.

Gautam Jalandhari (Editor)

Subscribe Us


Vists Counter

HITS : 5653450

Address


Jagrati Lahar
Jalandhar Bypass Chowk, G T Road (West), Ludhiana - 141008
Mobile: +91 161 5010161 Mobile: +91 81462 00161
Land Line: +91 161 5010161
Email: gautamk05@gmail.com, @: jagratilahar@gmail.com