- Date: 25 Jun, 2019(Tuesday)
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करतारपुर कॉरिडोर बनने से अपनी जमीन को लेकर चिंता में सीमावर्ती किसान

मांग- जिस किसान की जमीन लांघे में आती है उसका उचित मुआवजा दे सरकार

कई किसानों ने कहा- लांघे के लिये पुराना रास्ता ही तैयार करवाये सरकार

Jan7,2019 | KAMAL | BATALA

जहां एक तरफ दोनों देश भारत-पाकिस्तान की तरफ से श्री करतारपुर कॉरिडोर के लिये सड़कें बनाने की तैयारियां की जी रही हैं और इस कॉरिडोर को लेकर संगत में खुशी का आलम है वहीं डेरा बाबा नानक के वह किसान बेहद सहम और डर की अवस्था में है जिनकी जमीन में से लांघा बनाने की तैयारियां की जा रही हैं। दूसरी तरफ डेरा बाबा नानक के किसानों का मानना है कि वह संगत की लंबे समय से चली आ रही मांग श्री करतारपर कॉरिडोर खुलने की वजह से बहुत खुश है मगर उनको खदशा है कि लाघे के लिये सरकार उनकी जमीन का अपने घेरे में ले रही है। किसानों का कहना है कि ऐसा होने से उनको बडे नुकसान होने का खदशा है । वहीं किसानों ने सरकार से मांग की है कि अगर सरकार ने उनकी जमीन को लेना है तो उनकी जमीन के बदले उनको उचित मुल्य दिया जाये और अगर हो सके तो पुराने रास्ते को ही अपनाया जाये। इस संबंध में सोमवार को किसान नरिंदर सिंह निवासी डेरा बाबा नानक ने पत्रकारों को बताया कि उनको अपनी जमीन के उजड़ने का डर सता रहा है। उन्होंने कहा कि उनके मन में कई तरह के खदशे है। उन्होंने कहा कि श्री करतारपुर साहिब के लांघे के लिये पुरानी 100 फीट सड़क को ही तैयार किया जाये ताकि किसानों की जमीन का उजाड़ा कम से कम से हो सके।उन्होंने कहा कि सीमा पर रहने वाले लोग पहले ही कई मुश्किलों को झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार से मांग है कि लांघे में जो थोडा-बहुत जमीन का रकबा आये,उसका किसान को योग्य मुआवजा दिया जाये ताकि लोग किसी ओर बदलाव के बारे में सोच सकें। उन्होंने कहा कि वह अपनी जमीन को लेकर डरे हुये हैं। डेरा बाबा नानक के रहने वाले किसान बीर सिंह ने सरकार ने अपील है कि सीमा पर रहने के कारण वह कई बार उजडें है। उन्होंने कहा कि अगर कोई लड़ाई हो यां फिर को बाढ़ आये तो उनके लिये मुसीबत बन जाती हैं। वहीं युवा किसान गुरहरप्रीत सिंह गांव पखोके टाहली साहिब ने बताया कि बार्डर क्षेत्र के किसान तो पहले से दबे हुये हैं क्योंकि सीमा पर उनके खेत होने की वजह से उन्हें सुबह 9 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक काम करने दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सीमवर्ती किसान 50 प्रतिशत किसान बरसाती पानी से पीड़ित हैं। उन्होंने सरकार से मांग करते हुये कहा कि लांघे के लिये पुरानी सडक कोही बहाल किया जाये। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती किसान के पास पहले ही थोडी- थोडी जमीन है और किसान पहले ही बड़ी मुश्किलों से अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस दिन से रास्ता खोलने की बात चली है उसी दिन से सभी किसान खौफ में है कि पता नही कि किस किसान की जमीन लांघे में आ जानी है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि‌ अगर किसी किसान की जमीन लांघे के क्षेत्र में आती है तो उसका एक बार ही उचित मुआवजा दिया जाये।

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