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केद्र की नई जेड स्कीम सूक्ष्म उद्योग के लिए घातक : बादीश जिंदल

Oct3,2018 | GAUTAM JALANDHARI | LUDHIANA

फोपसिया के प्रधान बादीश जिंदल ने खुलासा किया है कि भारत सरकार की नई जेड स्कीम देश के 6 करोड़ सूक्षम उद्योगों के लिए बेहद घातक सिद्ध हो सकती है। पत्रकारों से बातचीत में जिंदल ने कहा कि विमुद्रीकरण , जीएसटी , मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया के बाद मोदी सरकार को सब से बड़ी असफलता जीरो इफेक्ट जीरो डिफेक्ट (जेड) स्कीम में मिली है। उन्होंने बताया किप्रधानमंत्री ने अपने सभी भाषणों में इस स्कीम का बढ़ चढ़ कर बखान किया है लेकिन इस स्कीम में देश के 6 करोड़ सूक्षम उद्योगों को देने के लिए कुछ भी नहीं है। जिंदल के अनुसार जेड स्कीम प्रधानमंत्री ने 18 अक्टूबर 2016 को लुधियाना में शुरू किया था। इस स्कीम का बजट 491 करोड़ था और प्रथम चरण में 22222 उद्योगों को ये सर्टिफिकेशन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उनके अनुसार भारत सरकार ने इस स्कीम के पैरामीटर विश्व स्तर के रखे है जिन्हे पूरा कर पाना देश के सूक्षम उद्योगों के लिए नामुमकिन है। जेड को भारत में आईएसओ की रिप्लेसमेंट के तौर पर लाया गया है जिसमें उद्योगों को उनकी क्षमता के अनुसार प्लैटिनम ,डायमंड , गोल्ड, सिल्वर और ब्रोज श्रेणिओ में बांटा जाना है। बकौल जिंदल, इस स्कीम की शर्ते इतनी सखत है कि दो वर्ष में पुरे भारत में मात्र पांच सूक्षम उद्योगों को ही ये सर्टिफिकेशन मिल पाई है। और इसकी शर्ते इतनी सखत है कि सूक्षम उद्योगों के लिए उन्हें पूरा करना लगभग असंभव है। उन्होंने बताया कि अब तक भारत में 20935 लोगो ने जेड के लिए आवेदन किया है लेकिन मात्र 68 उद्योगों को ही जेड सर्टिफिकेशन लेने में सफलता मिली है। 68 उद्योगों में 50 लघु 13 मध्यम और मात्र 5 सूक्षम उद्योग है जबकि भारत में 98 त्न सूक्षम उद्योग है जिनकी संख्या 6 करोड़ से ऊपर है। जिंदल ने आगे बताया कि पंजाब में अभी तक मात्र 2 उद्योगों को सफलता मिली है , तमिलनाडु 13 सर्टिफिकेट्स के साथ पहले नंबर पर, गुजरात और महाराष्ट्र 10 -10 दूसरे नंबर पर, हरयाणा 8 के साथ तीसरे और कर्नाटका 5 के साथ चौथे नंबर पर है। उत्तरांचल और उत्तर प्रदेश भी 3 -3 के साथ पंजाब से आगे है। उन्होंन कहा कि जेड की शर्ते इतनी सख्त है के भारत में अभी तक किसी भी उद्योग को प्लैटिनम केटेगरी में सर्टिफिकेशन नहीं मिली है और मात्र एक यूनिट को डायमंड श्रेणी में चुना गया है। उनके अनुसार इस स्कीम की सर्टिफिकेशन क्वालिटी कौंसिल ऑफ इंडिया कर रही है और इस कंपनी के पास ना तो पर्याप्त मात्रा में स्टाफ है और न ही भारत के राज्यों में इसके अपने ऑफिस है है। जिंदल ने बताया कि देश में इस स्कीम के प्रचार के लिए 628 मीटिंग्स हो चुकी है और 117 से भी ज्यादा ट्रेनिंग कैम्प्स लग चुके है लेकिन फिर भी मात्र 68 उद्योगों की सर्टिफिकेशन होना इस स्कीम की असफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस नई जेड व्यवस्था के बाद सूक्षम श्रेणी को काफी नुकसान होने वाला है क्यूंकि भारत की सभी पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर खरीददार जेड सर्टिफिकेशन के आधार पर ही रूस्रूश्व उद्योगों से अपना माल खरीदेगी। जिस से सूक्षम उद्योग को इस स्कीम के लाभ की जगह हानि होने की पूरी संभावना है। उन्होंने बताया किदेश के 6 करोड़ सूक्षम उद्योगों को इस स्कीम का लाभ देने के लिए सरकार को इस में जरूरी बदलाव कर इसे आसान बनाना होगा अगर ऐसा न हुआ तो सरकार की सभी स्कीमों का लाभ देश के लघु और माध्यम उद्योगों को ही मिल पाएगा जिस की संखया मात्र 2 प्रतिशत है।

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