- Date: 12 Dec, 2018(Wednesday)
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मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में 5 प्रयोगशालाओं को शुरु करने दी अनुमति

Jul20,2018 | RAKESH SHARMA | KURUKASHETRA

उपायुक्त डा. एसएस फुलिया ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर देने और मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच गांवस्तर पर ही करवाने के उदेश्य से ग्रामीण स्तर पर 5 प्रयोगशालाएं खोलने की अनुमति दे दी है। इन प्रयोगशालाओं पर किसानों द्वारा 5-5 लाख रुपए का बजट खर्च किया जाएगा और राज्य सरकार की तरफ से प्रत्येक प्रयोगशाला के लिए 75 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाएगा।वे शुक्रवार को उपायुक्त कार्यालय में ग्रामीण स्तर पर मिट्टी जांच प्रोजैक्ट के तहत कृषि विभाग व कमेटी के सदस्यों की एक बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कमेटी के सदस्यों की सहमति से जिला कुरुक्षेत्र में शाहबाद ब्लाक के गांव डंगाली के प्रगतिशील किसान कर्ण सिकरी, बाबैन ब्लाक के गांव रामपुरा से विशाल, पिपली ब्लाक के गांव कौलापुर से रोहित कुमार, बाबैन के कलाल माजरा से कुनाल व लाडवा के गांव खेड़ी दबदलान से सब्जी उत्पादक प्रोडूयसर कम्पनी लिमिटेड को ग्रामीण क्षेत्र में मिट्टी की जांच करने के लिए प्रयोगशाला खोलने की अनुमति दे दी है। इस एक प्रयोगशाला पर किसान द्वारा 5 लाख रुपए खर्च किया जाएगा और सरकार द्वारा प्रयोगशाला के लिए 75 प्रतिशत अनुदान यानि 3 लाख 75 हजार रुपए अनुदान के रुप मे दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि किसान को मिट्टी के सैम्पल एकत्रित करने, उनकी रिपोर्ट तैयार करने से सम्बन्धित 300 रुपए प्रति सैम्पल के हिसाब सरकार द्वारा दिए जाएंगे और प्रत्येक प्रयोगशाला को एक साल में 3 हजार सैम्पल एकत्रित करने का लक्ष्य भी दिया है। इस जिले में पिहोवा, थानेसर और शाहबाद में मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए सरकारी प्रयोगशालाएं पहले से ही कार्य कर रही है और पिछले 2 सालों के फसल चक्र में 60 हजार 299 सैम्पलों की जांच की जा चुकी है और 1 लाख 75 हजार किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किए जा चुके है। उन्होंने कहा कि 5 नई प्रयोगशालाओं के लिए संचालकों को एक दिन का प्रशिक्षण और प्रयोगशाला में काम करने वाले लोगों को करीब 3 सप्ताह का प्रशिक्षण करनाल एनडीआरआई से दिलवाया जाएगा।उपायुक्त ने कहा कि पांचों प्रयोगशालाओं के संचालकों को अपने क्षेत्र से ही किसानों के खेतों से मिट्टी के सैम्पल एकत्रित करने होंगे और मिट्टी की जांच करने के दौरान तकनीकी पर पूरा फोकस रखना होगा ताकि सही रिपोर्ट किसान को दी जा सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर पर मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं को खोले जाने की योजना को वर्ष 2022 तक किसान की आय दौगुनी करने की योजना से जोड़ा गया है। इस जिले में एकत्रित सैम्पलों की रिपोर्ट से यह भी खुलासा हुआ है कि मिट्टी में यूरिया की मात्रा ज्यादा है और जिंक, सल्फर और पोटाश की कमी पाई गई है। इससे यह तथ्य सामने आए है कि भूमि का स्वास्थ्य लगातार खराब होता जा रहा है जिससे अनाज व अन्य फसलों के उत्पादन में कमी आ रही है। इन प्रयोगशालाओं के शुरु होने से किसानों को उनके खेतों की मिट्टी की जांच करवाने की सुविधा आसपास गांवस्तर पर ही मिल जाएगी। इस मौके पर कृषि एवं कल्याण विभाग के उपनिदेशक डा. कर्मचंद, जिला बागवानी अधिकारी जोगिन्द्र बिसला, कृषि विज्ञान केन्द्र से डा. हरिओम, नाबार्ड के डीडीएम आरएस मोर, सदस्य सचिव राजीव चौधरी, प्रगतिशील किसान कर्ण सीकरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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