- Date: 19 Jan, 2019(Saturday)
Time:
 logo

साहित्य के हवन कुण्ड में विचारों की अग्नि को प्रकाशमान करते हुए ज़ारी रखा

Feb16,2018 | GAUTAM JALANDHARI | LUDHIANA

स्थानीय सतीश चन्द्र धवन राजकीय महाविद्यालय, लुधियाना के साहिर प्रेक्षागृह के प्रांगण में दो दिवसीय अन्तर-राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन का आगाज़ विशिष्ट वक्ताओं, और गणमान्य अतिथियों एवं प्रबुद्ध साहित्यकारों के अभिवादन के साथ हुआ और साहित्य के हवन कुण्ड में विचारों की अग्नि को प्रकाशमान करते हुए ज़ारी रखा। चर्चा के विशेष उद्घाटन सत्र में प्राचार्य डॉ. धर्म सिंह संधू जी ने विधिवत ढ़ंग से सभागार में विराजमान प्रबुद्धजनों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए आज के समागम की सफलता के लिए बधाई प्रदान की और कहा कि बीते दिन की तरह ही आज का दिन भी विचारों की गंगा से सराबोर रहेगा और सभी इस संगोष्ठी की सफलता में अपना विशिष्ट योगदान देंगे। कार्यक्रम के आरंभ में विशिष्ट अतिथि आईएएस अधिकारी कशिश मित्तल, नीति आयोग द्वारा अपने वक्तव्य के माध्यम से महाविद्यालय के छात्र छात्राओं के साथ अपनी उपलब्धियों को सांझा किया। साथ ही उन्होंने कहा देश के विकास के लिए योगदान देना प्रत्येक भारतीय नागरिक का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। प्रथम सत्र के स्रोत वक्ता नानक विश्वविद्यालय से आए मनजिंदर सिंह ने भारोपीय भाषा परिवार से हिंदी पंजाबी के संबंधों पर प्रकाश डाला साथ ही उन्होंने बताया गुरुवाणी की में ब्रजभाषा फारसी मराठी संस्कृत का प्रभाव बताया व कबीर ,रविदास, नाम देव, जय देव, धन्ना आदि संतों की वाणी का अंश गुरु ग्रंथ साहिब में देखने को मिलता । सार रूप में उन्होंने कहा कि पंजाब की ओर से भारत को दिया गया उपहार गुरु ग्रंथ साहिब ही है। मुख्य वक्ता के रूप में राकेश कुमार जी ने भूमंडलीकरण के इस दौर में भाषा के अस्तित्व के आगे खड़े प्रश्नों पर प्रकाश डाला। अंग्रेजी के सामने क्षेत्रीय भाषाओं का आकार या उनका भविष्य कैसा होगा उस पर अपनी बात कही। जिन राष्ट्रों को पहले साहित्य या विचार के केंद्र में रखा जाता था उनके सामने छोटे राष्ट्र की भाषा का अस्तित्व एक चुनौती की तरह देखने को मिलता है जैसे अंग्रेजी के सामने हिब्रू की उपस्थिति। यह सब हुआ है साधन और साधना के अंतर के कारण जो समाज साधना या क्षमताओं के अभाव के दौर में केवल साधन जुटाने में लगा रहेगा और आगे गति नहीं कर पाएगा। विशिष्ट वक्ता के रूप में आए फूल चंद मानव ने कहा कि पिछले 70 साल में उपन्यासों में पंजाबी साहित्यकारों की उपस्थिति अधिक है। साथियों की उपस्थिति अनुवाद के माध्यम से तमिल तेलुगू मलयालम कन्नड़ में भी देखने को मिलती है। अनुभूति और अभिव्यक्ति का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। अनुवाद के हस्ताक्षर वर्तमान में 100 से भी अधिक हैं जो कार्यरत हैं। प्रथम सत्र के अध्यक्षीय टिप्पणी करते हुए मनमोहन सहगल ने कहा की भाषा अमर है । भाषा के समकक्ष कोई भी भाषागत संकट उपस्थित नहीं है। भाषा भावनाओं का संप्रेषण करता है। यह सांस्कृतिक संबंध का भी उदाहरण है इसीलिए फरीद ही हिंदी के पहले कवि हैं जोकि पंजाब क्षेत्र के श्रेष्ठ कवियों में से एक हैं। उनकी 12 वीं शताब्दी में लिखे गीतों में पंजाबी हिंदी के शब्दों को आज ही पढ़ा जा सकता है। कार्यक्रम के दूसरे सत्र का आरम्भ विशिष्ट अतिथि श्री जितेन्द्र कुमार, डॉ. योजना रावत, पंजाब विश्विद्यालय, चंडीगढ़, सेवानिवृत्त प्रो. राजिंद्र जैन, श्री विनोद बब्बर जी राष्ट्र किंकर के संपादक और श्री अरुण भगत जी माखनलाल चतुर्वेदी विश्विद्यालय से तथा जय प्रकाश जी के साहित्यिक विचारों के प्रकाश के साथ,अभिवादन करते हुए हुआ, उन्होंने हिन्दी पंजाबी भाषा के उद्भव का सूत्र अपभ्रंश की पंक्तियों के साथ बताते हुए बीजारूपेण किया। तदुपरान्त श्री अरुण कुमार भगत जी ने समाज नियम के नियामक पत्रकारिता के महत्त्व को सामने रखा और कहा कि जल्दबाजी में लिखे गए साहित्य पत्रकारिता से इतिहास को बताने का काम लिया जाता है। तथ्य पर आधारित सूचनाओं से सत्य तक पहुंचने का काम भी पत्रकारिता ही करती है।अतः समाज निर्माण के लोक मान्यता के आधार पर ही इसे चौथा स्तम्भ का नाम दिया गया है। भारत में पत्रकारिता पर वामपंथ का प्रभाव देखने को मिलता है। इससे संपादकीय का स्तर भी बदलने लगा है। वर्तमान में पत्रकारिता विचार प्रधान हो गया है। इसमें समाचार का पुट कम हुआ है। डॉ. योजना रावत जी ने अपने वक्तव्य में आँठवें दशक के परिवर्तन का हवाला देते हुए जनसंचार क्रांति के उद्गम से सत्ता के विकेन्द्रीयकरण के कारण तदयुगीन परिदृश्य के परिवर्तन को सामने रखा और इस परिवर्तन के कारण जो नए विमर्श की बात की विशेष रूप से स्त्री विमर्श की। जिसमें मीराबाई और पंजाबी के अमृता प्रीतम के साहित्य के विशेष योगदान को महत्व दिया और बताया कि स्त्री विमर्श के साहित्यिक सरोकारों के विद्रोहात्मक स्वरूप की बात की। निरुपमा दत्त, सविता सिंह, पाल कौर आदि महिला कवयित्रियों की वाणी के माध्यम से अपनी बात कही। इसके बाद श्री हरविंदर सिंह जोशी पंजाबी विभाग से ने प्रवास और नॉस्टेल्जिया विषय पर बात करते हुए उनके अस्तित्व की, उनकी सोच की, उनकी जीवन शैली की और रोज़मर्रा के अनुभवों पर अपने विचार रखें कि कैसे हम प्रवासी बनते हैं और प्रवास होने के कारण कैसे बनते हैं इश्क़, ग़ैर इश्क़, मज़दूरी, कृषि, साम्प्रदायिक दंगे इत्यादि और भी ऐसे कारणों को सामने रखा जिनसे हमारा समाज प्रभावित हुआ है। इसके बाद डी ए वी जालंधर से हिन्दी विभाग के प्रबुद्ध विद्वान डॉ. बल्वेन्द्र सिंह भूषण जी ने अपने वक्तव्य में पंजाब में भाषा के संकट की बात का हवाला देते हुए कहा कि भाषा किसी धर्म की सम्पत्ति नहीं होती बल्कि भरीपूरी संस्कृति भी होती है। पंजाब वह धरती है जहाँ ऋग्वेद की ऋचाएँ रची गईं, और निरन्तर ये विकास हुआ और ये बिना राजनैतिक हस्तक्षेप के बिना विकसित हुई। आज भाषा का अनादर घिनौनी राजनैतिक के कारण हो रहा है ये सोचने का विषय है। आज भाषा विरोधी नीतियाँ भाषा का बलात्कार कर रही हैं। आज ये संकट का विषय है इसपर गहनता से चिंतन की ज़रूरत है । वाणिज्य विभाग से प्रो. हरविलास हीरा जी ने दो टूक शब्दों में पंजाबी भाषा में इंटरनेट पर होने वाली ग़लत वाक्य-विन्यासों पर आँकड़ों सहित अपनी बात रखी। और ख़ासतौर पर युवाओं में उसके ग़लत लेखन व् प्रचलन पर टिप्पणी की। समापन सत्र के अध्यक्षीय टिप्पणीकार के रूप में डॉ. विनोद बब्बर जी ने अपने आशीर्वादस्वरूप इस सत्र के कुशल संयोजन हेतु अथितियों, प्राध्यपकों और विशेषतः विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। तीसरे सत्र का प्रारम्भ डॉ. जयप्रकाश जी ने कहा ये समागम पुल की तरह था और बताया कि पंजाब की संस्कृति बरक़रार रहे। इसका पल्लवन भाषा के माध्यम से हो सके। उन्होंने बताया कि देश अगर बचा तो हम बचे , देश उन्नत करेगा तो हम उन्नत होंगे। और भाषाई संकट की चिंता पर बात करते हुए कहा कि भाषा के नाम पर भले ही कुछ लोग कालिख़ पोतें, तो वो एक न एक दिन धूल ही जाएगी और नए दौर में नई ऊर्जा सहित भाषा का बहता नीर बहता जाएगा और इसे बहता जाना ही चाहिए। जितेन्द्र श्रीवास्तव जी ने अपने वक्तव्य में भाषा की अभिव्यक्ति के आकर्षण की बात का हवाला देते हुए कहा कि भाषा का आकर्षण उसकी ध्वन्यत्मक्ता में होती है जो अपनी मूल भाषा में ही होती है। आदर्श समाज की परिभाषा देते हुए कहा कि कोई भी समाज ऐसा नहीं है जो विसंगतियों से न भरा हो, इन्हीं विसंगतियों से होते हुए समाज आपने आप में सम्पूर्ण समाज की बुनियाद बनाता है। कबीर कोई सामाजिक चिंतक नहीं थे, बल्कि समाज की विसंगतियों पर अपनी बात रखते थे। हमें अपनी वैचारिकता के आग्रह को देखने की ज़रूरत है। आज भाषा का संकट विदेशी भाषा से है। आगे उन्होंने कहा कि ज़रूरत है कि भाषा के अकादमिक घराने बनाये जाएं जिससे उनका आपसी बहनों की तरह मिलन हो सके। इससे हमारी लघुताग्रँथियाँ दूर होंगी। भाषा की गरिमा की बात करते हुए कहा हिन्दी एक उदार भाषा है । हिन्दी का कभी भी साम्राज्यवादी आग्रह नहीं रहा। यह लोकतान्त्रिक भाषा है। अतः भाषा की गरिमा को बनाये रखने के लिए इसे और पढ़ा जाये, पढ़ाया जाये, औरों को भी ऐसी संगोष्ठी के माध्यम से सर्वजन को बताया जाए। इसके बाद समापन सत्र के अंतीम चरण में सदानन्द प्रसाद गुप्त जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज त्रासदी ये हैं हम सब अपनी भाषा के मूल से कट चुके हैं, क्योंकि अपनी मूल भाषा का स्वरूप अंग्रेजी भाषा ने ले लिया है। जिसे हम हिंग्लिश भाषा कहते हैं। हमें अपनी भाषायी अस्मिता को बचाये रखना भी है। अतः दे के भाव से ही काम करना चाहिए हिन्दी भाषा में दे का भाव विद्यमान है। अंत में उन्होंने कहा कि ये बड़ा ही ख़ूबसूरत बात है और गरिमा की हिन्दी विभाग ने ऐसा आयोजन किया। अंत में सम्मान समारोह में मुख्यातिथियों में प्राचार्य डॉ. धर्म सिंह संधू जी का, विभागाध्यक्ष प्रो. मुकेश कुमार अरोड़ा जी का, प्राचार्य एन आर शर्मा जी, का विशेष तौर पर धन्यवाद किया। इस दौरान मंच संचालन की भूमिका डॉ. सौरभ कुमार जी ने बख़ूबी निभाई।

साहित्य के हवन कुण्ड में विचारों की अग्नि को प्रकाशमान करते हुए ज़ारी रखा 150


साहित्य के हवन कुण्ड में विचारों की अग्नि को प्रकाशमान करते हुए ज़ारी रखा
साहित्य के हवन कुण्ड में विचारों की अग्नि को प्रका

Comments


About Us


Jagrati Lahar is an English, Hindi and Punjabi language news paper as well as web portal. Since its launch, Jagrati Lahar has created a niche for itself for true and fast reporting among its readers in India.

Gautam Jalandhari (Editor)

Subscribe Us


Vists Counter

HITS : 5516154

Address


Jagrati Lahar
Jalandhar Bypass Chowk, G T Road (West), Ludhiana - 141008
Mobile: +91 161 5010161 Mobile: +91 81462 00161
Land Line: +91 161 5010161
Email: gautamk05@gmail.com, @: jagratilahar@gmail.com