- Date: 16 Nov, 2018(Friday)
Time:
 logo

गूगल के डूडल में आज मिर्जा ग़ालिब

Dec27,2017 | Agency | NEW DELHI

गूगल ने बुधवार को उर्दू के महान शायर मिर्जा ग़ालिब के 220वीं जयंती पर उनको अपना डूडल समर्पित किया है। मिर्जा ग़ालिब का पूरा नाम मिर्जा असल-उल्लाह बेग खां था। उनका जन्म 27 दिसंबर 1797 को मुगल शासक बहादुर शाह के शासनकाल के दौरान आगरा के एक सैन्य परिवार में हुआ था। उन्होंने फारसी, उर्दू और अरबी भाषा की पढ़ाई की थी। गूगूल के डूडल में मिर्जा हाथ में पेन और पेपर के साथ दिख रहे हैं और उनके बैकग्राउंड में बनी इमारत मुगलकालीन वास्तुकला के दर्शन करा रही है। गूगल ने अपने ब्लॉग में लिखा है, 'उनके छंद में उदासी सी दिखती है जो उनके उथलपुथल और त्रासदी से भरी जिंदगी से निकल कर आई है- चाहे वो कम उम्र में अनाथ होना हो, या फिर अपने सात नवजात बच्चों को खोना या चाहे भारत में मुगलों के हाथ से निकलती सत्ता से राजनीति में आई उथल-पुथल हो। उन्होंने वित्तीय कठिनाई झेली और उन्हें कभी नियमित सैलरी नहीं मिली।' ब्लॉग के मुताबिक, 'इन कठिनाइयों के बावजूद ग़ालिब ने अपनी परिस्थितियों को विवेक, बुद्धिमत्ता, जीवन के प्रति प्रेम से मोड़ दिया। उनकी उर्दू कविता और शायरी को उनके जीवनकाल में सराहना नहीं मिली, लेकिन आज उनकी विरासत को काफी सराहा जाता है, विशेषकर उर्दू गजलों में उनकी श्रेष्ठता को।' छोटी उम्र में ही ग़ालिब से पिता का सहारा छूट गया था जिसके बाद उनके चाचा ने उन्हें पाला, लेकिन उनका साथ भी लंबे वक्त का नहीं रहा। बाद में उनकी परवरिश नाना-नानी ने की। ग़ालिब का विवाह 13 साल की उम्र में उमराव बेगम से हो गया था। शादी के बाद ही वह दिल्ली आए और उनकी पूरी जिंदगी यहीं बीती। Acoording to agency input. ‘‘हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे, कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और’’। मिर्ज़ा ग़ालिब ने बरसों पहले अपने आप को बहुत खूब बयां किया था और आज उनकी 220वीं सालगिरह के मौके पर भी यह शेर उतना ही प्रासंगिक है। शेर-ओ-शायरी के सरताज कहे जाने वाले और उर्दू को आम जन की जुबां बनाने वाले ग़ालिब को उनकी सालगिरह के अवसर पर गूगल ने एक खूबसूरत डूडल बना कर उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की है। उर्दू और फारसी भाषाओं के मुगल कालीन शायर ग़ालिब अपनी उर्दू गजलों के लिए बहुत मशहूर हुए। उनकी कविताओं और गजलों को कई भाषाओं में अनूदित किया गया। डूडल में लाल रंग का लबादा और तुर्की टोपी पहने नजर आ रहे हैं और उनके पीछे जामा मस्जिद बनाई गई है। उन्होंने इश्क से लेकर रश्क तक प्रेमी-प्रेमिकाओं की भावनाओं को अपनी शायरी के जरिए बखूबी बयां किया। ग़ालिब मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के बड़े बेटे को शेर-ओ-शायरी की गहराइयों की तालीम देते थे। उन्हें वर्ष 1850 में बादशाह ने दबीर-उल-मुल्क की उपाधि से सम्मानित किया। ग़ालिब का जन्म का नाम मिर्जा असदुल्ला बेग खान था। उनका जन्म 27 दिसंबर 1797 को आगरा में हुआ था। ग़ालिब ने 11 वर्ष की उम्र में शेर-ओ-शायरी शुरू की थी। तेरह वर्ष की उम्र में शादी करने के बाद वह दिल्ली में बस गए। उनकी शायरी में दर्द की झलक मिलती है और उनकी शायरी से यह पता चलता है कि जिंदगी एक अनवरत संघर्ष है जो मौत के साथ खत्म होती है। ग़ालिब सिर्फ शेर-ओ-शायरी के बेताज बादशाह नहीं थे। अपने दोस्तों को लिखी उनकी चिट्ठियां ऐतिहासिक महत्व की हैं। उर्दू अदब में ग़ालिब के योगदान को उनके जीवित रहते हुए कभी उतनी शोहरत नहीं मिली जितनी इस दुनिया से उनके रुखसत होने के बाद मिली। ग़ालिब का 15 फरवरी 1869 को निधन हो गया। पुरानी दिल्ली में उनके घर को अब संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है।

गूगल के डूडल में आज मिर्जा ग़ालिब 149


गूगल के डूडल में आज मिर्जा ग़ालिब
गूगल के डूडल में आज मिर्जा ग़ालिब

Comments


About Us


Jagrati Lahar is an English, Hindi and Punjabi language news paper as well as web portal. Since its launch, Jagrati Lahar has created a niche for itself for true and fast reporting among its readers in India.

Gautam Jalandhari (Editor)

Subscribe Us


Vists Counter

HITS : 5271981

Address


Jagrati Lahar
Jalandhar Bypass Chowk, G T Road (West), Ludhiana - 141008
Mobile: +91 161 5010161 Mobile: +91 81462 00161
Land Line: +91 161 5010161
Email: gautamk05@gmail.com, @: jagratilahar@gmail.com