- Date: 17 Nov, 2018(Saturday)
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लुधियाना हादसा : जम्हूरी अधिकार सभा पंजाब ने गोला प्लास्टिक फैक्टरी में हुए अग्निकांड की रिपोर्

हादसे में मारे गए एक व्यक्ति को बताया पूरे हादसे का जिम्मेदार

हादसे में मारे गए एक व्यक्ति को बताया पूरे हादसे का जिम्मेदार

Nov20,2017 | RAJINDER ARORA | LUDHIANA

सूफिया चौक स्थित गोला प्लास्टिक फैक्टरी में अग्निकांड के बाद गिरी बिल्डिंग के मामले की जांच जम्हूरी अधिकार सभा पंजाब की तरफ से की गई। जांच कमेटी में प्रो. जगमोहन सिंह, जसंत जीरख, सतीश सचदेवा, रैक्टर कथूरिया, प्रदीप शर्मा और एडवोकेट हरप्रीत जीरथ शामिल थे। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने इस हादसे में मारे गए एक व्यक्ति को बताया। उनका कहना है कि उक्त व्यक्ति ने ही आग पर काबू पाने वाले कर्मचारियों के काम में अडि़ंगा डाला और उन्हें सामान उठाने के लिए जबरदस्ती अंदर जाने के लिए कहा। जिसके बाद बिल्डिंग गिर गई और सभी लोग नीचे दब कर मर गए। अपने तौर पर की गई जांच में संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि जांच के मुताबिक आग सुबह करीब सवा छह बजे लगी और कुछ समय बाद फायर ब्रिगेड की गाडियां वहां पहुंच गई। सवा दस बजे तक आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन एक नेता अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचे और दमकल विभाग के कर्मचारियों के काम में अडि़ंगा डाला और उन्हें सामान निकालने के लिए जबरदस्ती अपने साथ ले गए। इसी दौरान फैक्टरी गिर गई और सभी मलबे के नीचे दब गए। जांच के दौरान पाया गया कि उक्त नेता एक दिन पहले भी अपने कुछ साथियों के साथ उसी फैक्टरी में आया था और वहां बैठा रहा। इसके अलावा कई नेताओं की फैक्टरी में आवाजाही रहती थी। लोगों ने इस फैक्टरी को इलाके से बाहर करने के लिए काफी जोर अजमाइश की थी, लेकिन कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकी। जांच के दौरान यह भी पता चला कि जिस समय आग लगी फैक्टरी बंद थी और बिजली की सप्लाई भी बंद थी। लेकिन इलाके के सियासी लीडर इसे कुदरती हादसा बता रहे है। किसी को फैक्टरी के अंदर पड़े ज्वलनशील पदार्थो के बारे में नहीं पता था कि कितनी मात्रा में अंदर पड़े है और न ही किसी अधिकारी ने इस बारे में किसी अधिकारी ने उनसे पूछा। फैक्टरी की निचली मंजिल में सीमेंट की बजाए गारे की चिनाई की हुई थी। जांच के दौरान यह भी पता चला कि मलबे के नीचे दबे मुलाजिमों के परिवारिक सदस्यों को इस बात का भी गुस्सा है कि हादसे के बाद मिल्ट्री तो बुलाई गई, लेकिन उससे बिना काम लिए ही उसे वापिस भेज दिया गया। इस हादसे में मारे गए नेता का शव मिलने के बाद रेस्क्यू अप्रेशन के काम में स्पीड भी कम कर दी गई थी। इसके अलावा भी कई तरह की कमिया पाई गई। जांच कमेटी मांग करती है कि इस बड़े हादसे की जांच पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जज से करवाई जाए ताकि पूरी तरह से स्पष्ट जांच हो सके। ------------------------ लुधियना के सुफियां चौक स्थित अमरसन प्लास्टिक फैक्टरी में आग के बाद बिल्डिंग के जमींदोज होने पर मलबे से सेना, एनडीआरफ, एसडीआरएफ व प्रशासन ने संयुक्त राहत आपरेशन करके दलित नेता लक्ष्मण द्रविड समेत 13 लोगों के शव तो निकाल लिये और 2 लोगों को जिंदा बचा लिया पर यहां पर लापता हुए तीन फायरमैनों का कुछ नहीं पता लग सका है। जबकि राहत टीम ने छह दिन बाद मौके से पूरा मलबा उठा लिया है। रात को करीब अढाई बजे तक राहत काम पूरा करके टीमों ने अब काम बंद कर दिया है। मौके पर अब साथ वाली एक बिल्डिंग का कुछ मलबा ही शेष है। उसे प्रशासन की मंजूरी के बाद ही उठाया जाना है। तीनों लापता फायर कर्मियों व अन्य संभावित लोगों के दबे होने की सूचना थी । तीनों के परिवार भ्भी छह दिन से इंतजार कर रहे थे। लेकिन अब न तो शव मिले न ही कोई सुराग । रात को टीमों आग भी बुझाती रही व मलबा भ्भ्भी उठाती रही। रविवार सुबह नो बजे डीसी प्रदीप अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर, नगर निगम कमिश्नर जसकरण सिंह ने अन्य अधिकारियों व एनडीआरएफ की टीम के साथ मौके का जायजा लिया तथा मौके से पूरी जानकारी हासिल की। जिसके बाद मीडिया से बातचीत में डीसी प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि मौके से पूरा शत प्रतिशत मलबा हटाया जा चुका है। जिन तीन फायर कर्मियों के अंदर फंसे होने की सूचना थी। उनके शव या कोई सुराग नहीं लग सका है। फिलहाल मलबा उठने से एनडीआरएफ का काम खत्म हो चुका है तथा अब केवल नगर निगम की टीमें उठाए गए मलबे में से मैनुअली सर्च करके लापता फायर कर्मियों का कोई सुराग जुटाने का प्रयास करेंगी। उन्होंने बताया कि जो मलबा व मशीनरी जांच में जरूरी थी,ख्उसे जांच अधिकारियों ने अपने पास रखा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में सीएम कैप्टन अमरेंद्र सिंह द्वारा डिविजल कमिश्न पटियाला को जांच सांंैपी हुई है। जिसके बाद डिविजनल कमिश्नर द्वारा जांच शुरू करके संबंधित विभागों से बिल्डिंग संबंधी रिकार्ड मांगा गया है। इसके अलावा मुआवजा व नौकरी इत्यादी देने का काम भी जारी है। जिन साथी वाली बिल्डिंगों का नुकसान हुआ है, उनको भी राहत देने के लिए रेवेन्यू व निगम एसैसमेंट करेगा व कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा पुलिस ने इस मामले में फैक्टरी मालिक इंद्रजीत सिंह गोला के खिलाफ एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है तथा कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बिल्डिंग बायलॉज को लेकर कडे आदेश दिए गए है लेकिन लोग फिर भी उल्लंघन करते है। जिन पर कडी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा शहर की अनसेफ बिल्डिंगों को भ्भी चेक किया जा रहा है। इस मौके पर पुलिस कमिश्नर आरएन ढोके ने बताया कि हादसे के बाद सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी तथा राहत के काम में जुटी रही। इसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, निगम व पुलिस के साथ साथ एनजीओ व स्थानीय नेताओं ने भ्भी बहुत अच्छा काम किया तथा एक टीम वर्क से ही राहत काम जल्दी संभव हो पाया। इसमें पुलिस ने फैक्टरी मालिक इंद्रजीत सिंह गोला के खिलाफ पहले ही मामला दर्ज करके उसे गिरफतार किया जा चुका है तथा उसे पूछताछ चल रही है। यह बिल्डिंग पूरी तरह इललीगल ढंग से थी तथा यहां पर कैमिकल भी पूरी तरह इललीगल ढंग से स्टोर था । अब पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी हुई है। डिविजनल कमिश्रर पटियाला भी जांच कर रहे है। भविष्य में इसके पीछे जिसकी भी मिलीभगत सामने आई, उसे भी नामजद किया जा सकता है। इस मौके पर नगर निगम कमिश्नर जसकरण सिंह ने बताया कि नगर निगम द्वारा शहर भर की आवासीय क्षेत्रों में चल रही फैक्टिरयों का सर्वे किया जा रहा है तथा इनकी पूरी तरह से जांच की जाएगी तथा यह जांच 15 दिन में मुकममल कर ली जाएगी। जिसमें अनियमितताओं की रिपोर्ट तैयार करके आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस बिल्डिंग को 1974 से पहले बनने होने के बाद बिल्डिंग मालिक ने धीरे धीरे इसको बढाया है तथा असैसमेंट में निगम को गलत जानकारियां दी है। जिस पर इसे नोटिस भी निकाले गए थे। फिलहाल पटियाला डिविजनल कमिश्नर जांच कर रहे है। यदि इसमें निगम के किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आई तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा अनसेफ बिल्डिंगों को भ्भी चेक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आग लगने के बाद संबंधित लोग निगम फायर अधिकारियों को सहयोग की बजाये आरोप प्रत्यारोप में पड जाते है। यदि वह तुरंत ही फैक्टरी की पूरी जानकारी उसी समय दे दें तो राहत में आसानी हो सकती है। इस केस में भी यदि फैक्टरी मालिक ने फायर टीम को कैमिकल की सही जानकारी दे दी होती तो शायद यह हादसा न होता। इस मौके पर एनडीआरएफ के सैकेंड इन कमांड शशीचंद्र ने बताया कि एनडीआएफ बाकी टीमों के साथ दिन रात राहत के काम में लगी रही। यहां कैमिकल होने के कारण हादसे वाले दिन से कल रात अढाई बजे तक रेस्कयू आपरेशन खत्म होने तक आग लगी रही। इसी कारण थोडा मुश्किल जरूर आई। लेकिन टीम आग बुझाती रही और रेस्कयू आपरेशन करती रही। मौके पर पहुंचे कांग्रेस के इलाका विधायक सुरेंद्र डाबर ने कहा कि ऐसे मौको पर किसी प्रकार की सियासत से गुरेज करते हुए सबको सहयोग करना चाहिए। सरकार की ओर से भी हर संभव कदम व मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। यह फैक्टरी एक इंडस्ट्रियल एरिया में बनी हुई थी। उधर, मौके पर ही लापता फायर कर्मियों के परिजनों ने प्रशासन प्रति अपना रौष जाहिर करते हुए कहा कि प्रशासन उन्हें लालीपाप दे रहा है। हमें हमारे बच्चों की चाहें अस्थियां दो लेकिन प्रशासन केवल लीपापोती कर रहा है। (अब तक की खबरें नीचे है) यहां के सूफिया चौक में प्लास्टिक उत्पाद फैक्टरी में आग के बाद इमारत ढहने मामले में नगर निगम कमिश्नर द्वारा बिल्ंिडग के मालिक इंद्रजीत सिंह गोला को फैक्टरी का मलबा इत्यादि उठाने की मंजूरी देने के बाद मलबे के नीचे दबे हुए तीन फायर कर्मियों के परिजनों द्वारा रोष जाहिर किया है तथा धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा, उन्होंने प्रशासन पर राहत कार्य में देरी करने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि निगम कमिश्रर से मंजूरी मिलने के बाद मालिकों द्वारा मशीनरी को उठाना शुरू कर दिया गया है। जिस मलबे से अभी तक 13 लाशें बरामद हो चुकी हैं और 2 व्यक्ति सी.एम.सी अस्पातल में उपचाराधीन हैं। जबकि 3 फायर कर्मी अभी भी मलबे में दबे हुए हैं, जिनके परिजन बीते छह दिनों से दिन-रात घटनास्थल के बाहर बैठे हैं। इस अवसर पर मलबे में दबे फायर कर्मियों के परिजन मलकीत कौर व तलविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि उनके बच्चों का अभी तक कुछ नहीं पता चल सका है और इन्हें इंसानी कीमतों से ज्यादा अपनी करोड़ों की मशीनरी की ज्यादा चिंता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें मशीनरी से कुछ लेना देना नहीं है, लेकिन उनके बच्चों के मिलने तक वे मशीनरी को यहां से नहीं जाने देंगे। वे मांग करते हैं कि मालिकों द्वारा मशीनरी सहित उठाए सामान को यहां मंगवाया जाए। इसी तरह, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा जानबूझ कर राहत कार्य में देरी की गई है। यदि सेना को लगाया जाता और जल्दी मलबा उठाया जाता, तो दो दिनों के भीतर सारा काम पूरा हो सकता था। अब तो उनकी अपने बच्चे मिलने की उम्मीद टूट चुकी है। उन्होंने अपने गांवों की पंचायतों सहित धरना देने की चेतावनी दी। _____ Previous News भ्सुफिया चौंक स्थित अमरसन पालिमर्स में हुए अगिनकांड व बिल्डिंग धवस्त मामले में जिला प्रशासन की एक बडी लापरवाही सामने आई है। इस मामले में मुखयारोपी इंद्रजीत सिंह गोला को पुलिस रिमांड के लिए अदालत में पेश करने के वक्त सरकारी वकील जतिंदर ङ्क्षसह चाहल ही गैर-हाजिर रहा। जिस पर कार्रवाई करते हुए जिला अटार्नी रविंदर कुमार अबरौल ने उपरोक्त सरकारी वकील के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि प्रासिक्यूशन पंजाब के डायरेक्टर वजिंदर सिंगला ने इस पर कडा संज्ञान लेते हुए उपरोक्त सरकारी वकील के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया जिसके चलते आज सरकारी वकील जतिंदर सिंह चाहल को शो कॉज नोटिस जारी कर दिया गया है। इस दौरान आज गोला का आज पुलिस रिमांड खत्म होने पर उसे डिविजन नंबर 2 की पुलिस द्वारा आज इलाका मैजिस्ट्रेट गुरप्रीत कौर की अदालत में पेश किया गया। जहां अदालत ने पुलिस की मांग पर आरोपी को पुन: दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जिला अर्टार्नी रविंदर अबरौल के निर्देशों पर सरकारी वकीलों की टीम ने आज अदालत में पुरजोर ढंग से केस रखते हुए अदालत को बताया कि आरोपी से अभी बिल्डिंग संबंधी नक्शे बरामद करना शेष है। वहीं आरोपी से बिल्डिंग में रखे हुए ज्वलनशील पदार्थ के बारे में पूछना बाकी है कि उसने उपरोक्त रासयन कहां से खरीदे थे। वकीलों ने यह भी कहा कि इस बिल्डिंग के बनने के दौरान अधिकारियों की मिलीभगत से संबंधित पूछताछ करनी भ्भी शेष है कि किन्होंने इस बिल्डिंग को बनाने में आरोपी की मदद की और नियमों का उल्लंघन होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की। वहीं, आरोपी के वकील ने कहा कि आरोपी का इस मामले में कोई कसूर नहीं है। न्यायधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। वहीं, पुलिस द्वारा अधिकारियों द्वारा निभाई गई भूमिका का पता करने के लिए मांगे गए पुलिस रिमांड में अगर आरोपी द्वारा पुलिस को कुछ खुलासा किया जाता है तो इस मामले में नगर निगम व संंबंधित अधिकारियों के नाम सामने आने पर उन पर गाज गिर सकती है। वहीं उन पर पुलिस मुकद्दमा भ्भी दर्ज किया जा सकता है। --------------------------- Previous update -------- औद्योगिक नगर लुधियाना में सोमवार की सुबह प्लास्टिक फैक्ट्री में हुए हादसे के दौरान मानयोग अदालत ने फैक्ट्री मालिक इंद्रजीत सिंह गोला को एक दिन के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जानकरी अनुसार फ स्र्ट क्लास मजिस्ट्रेट सर्वेश सिंह की अदालत में थाना डिवीजन न. 2 की पुलिस ने पेश किया और उनसे जरूरी पूछताछ का हवाला देकर रिमांड प्राप्त किया। स्मरण रहे सुफिया बाग चौक के नजदीक प्लास्टिक लिफाफे बनाने वाली अमरसन पालीमर फैक्टरी में सोमवारको आग लगी थी, जिसमें 13 के करीब जिंदा जल गए थे। जबकि 3 फायर ब्रिगेड कर्मचारी अभी भी लापता बताएं जा रहे है। पुलिस ने धारा 304 के तहत मामला दर्ज करके फैक्टरी मालिक इंद्रजीत सिंह गोला को गिरफतार किया। जबकि घटना के दिन फैक्ट्री ढहने के बाद इंद्रजीत गोला को दिल का दौरा पडऩे के कारण अस्पताल होना पड़ा। इस संबंध में गोला का सिविल अस्पताल में मैडीकल जांच हुई। उधर यह भ्भी पता चला है कि फारेंसिक टीम के 5 अफसरों ने मलबे में तबदील साइड पर जाकर कुछ सैंपल जुटाएं है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैक्ट्री में कौन-कौन सा कैमीकल इस्तेमाल होता था और किन कारणों से आग लगी। ------ लुधियाना में इमरात अग्नी कांड के चौथे दिन भी मलबे को हटाने का काम जारी है,,और मलबे में दबे लोगो को उनके पारिवारिक सदस्य ढूंढ रहे है,,और सरकार प्रशाशन को कोस रहे है,,और मलबे में फसे उन लोगो के पारिवारिक सदस्य एक आस लिए घटना सथल के बाहर ही इन्तजार कर रहे है और अपनों के बाहर निकलने की दुआए कर रहे है. अभी तक मलबे में फायर विभाग के तीन मुलाज़िम,,मनप्रीत सिंह,,मनोहरलाल,,और सुखदेव के पारिवारिक सदस्य घटना स्थल के बाहर इन्तजार कर रहे है,,मनप्रीत सिंह के जीजा का कहना है की मनप्रीत की माता जी अपंग है और पिता मिल्क पलांट से रिटायर हुए है और एक बहन है परिवार में कमाने वाला सिर्फ मनप्रीत ही है और परिवार को अभी भी विश्वास है की मनप्रीत अभी ठीक ठाक है। दूसरी तरफ मनहोर लाल और सुखदेव जो पिछले चार दिनो से इस खुनी मलबे में फसे हुए है उनका परिवार भी आँखों में आंसू लिए और एक आस लिए घटना सथल के बाहर ही इन्तजार कर रहे है,,मनोरलाल की बेटी को भगवान पर पूरी आस है की उसके पिता मलबे से सही सलामत बाहर आएंगे और मिडिया को इंटरवियु देंगे,,दूसरी तरफ सेखदेव के परिवार को भी अपने बेटे के सही सलामत बहार निकलने की पूरी आस है,, बहरहाल अभी तक इस पुरे हादसे में 13 लोगो की मौत की पुष्टी हुई है,,और अभी भी कइयों के मलबे में फसे होने की आशंका जताई जा रही है,,चौथे दिन भी एनडीआरएफ की टीम एसडीआरएफ की टीमें और लोकल प्रसाशन बचाव कार्य में जुटा हुआ है ___ लुधियाना पुलिस ने मुश्ताक गंज हादसे वाली फैक्टरी के मालिक इंद्रजीत सिंह गोला को पुलिस को हिरासत में लिया है। updae evening सुफियां चौक स्थित मुश्ताक गंज की एर्मसन पालिमर फैक्टरी आगजनी व बिल्डिंग धवस्त मामले में मुखयमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह द्वारा दिये आदेशों के बाद डिविजनल कमिश्नर पटियाला वीके मीना ने आज बुधवार को हादसे की जांच शुरू कर दी। जिसके तहत कमिश्नर मीना आज हादसा स्थल पर पहुंचे तथा हादसे में घायल हुए मरीजों का सीएमसी अस्पताल में पहुंचकर हाल जाना। इस संबंधी डिप्टी कमिश्नर दफतर में उच्चाधिकारियों से मीटिंग करते हुए कमिश्नर मीना ने अधिकारियों को अलग अलग हिदायतें जारी की। उन्होंने नगर निगम से जमींदोज हुई इमारत के हाउस/प्रापर्टी टैक्स/बिल्डिंग प्लान/सीवरेज व वाटर सप्लाई संबंधी रिकार्ड व रजिस्टेशन से संबंधित अन्य रिकार्ड रिपोर्ट सहित मांगे। इसके अलावा इंडस्ट्री डिपार्टमेंट से अलाटमेंट पत्र व बिल्डिंग प्लान संबंधी रिपोर्ट मांगी गई। पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को कहा गया कि वह विभाग द्वारा जारी एनओसी व मंजूरी पत्र पेश करे। इसी प्रकार फैक्टरी विभाग व श्रम विभाग से भी इमारत के लिए जारी एनओसी , रजिस्टे्रशन सर्टीफिकेट, पुलिस विभाग से इस संबंधी एफआईआर की कॉपी, फायर विभाग से एनओसी सर्टीफिकेट के साथ अब तक इमारत की हुई इस्पेक्शन संबंधी रिपोर्ट, बिजली विभाग से बिजली के कनेक्शन व उसके लोड संबंधी रिपोर्ट, कर एवं आबकारी विभाग से रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट व टैक्स संबंधी विवरण मांगे। कमिश्नर मीणा ने कहा कि इस को बिल्कुल जमीनी स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए वह इमारत में फायर बुझा रहे फायर मैनों से घटना की पूरी जानकारी लेंगे तथा भ्आग लगने पर भ्भीतर की स्थिति का पता करेंगे तथा इसके लिए उनके साथ विशेष मीटिंग जल्द करेंगे। इस फैक्टरी में असल में क्या धंधा चलता था तथा क्या उत्पादन किया जाता था, इसके लिए तथ्य जानने के लिए समय समय पर इंस्पेक्शन करने वाले विभागों से बात की जाएगी। उन्होंने राहत कार्यां में जुटे अधिकारियों को कहा कि इमारत के मलबे के नमूने लेकर जांच के लिए फौरेंसिक लैब में भेजा जाए ताकि पचा लग सके कि आग लगने के बाद बिल्डिंग में किस प्रकार का धमाका हुआ। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि इमारत में ऐसे कैमिकल हो, जो गैर कानूनी व नियमों के उल्ट स्टोर करके रखे हो। इससे पहले घटना वाले स्थान पर पत्रकारों से बातचीत में कमिश्नर मीणा ने कहा कि इस दर्दनाक हादसे के हर पहलू की जांच की जाएगी तथा यह देखा जाएगा कि कैमिकल को स्टोर करके फैक्टरी मालिकों ने कोई उल्लंघन तो नहीं किया। इसके अलावा निर्माण के दौरान किए गए उल्लंघन का भ्भी पता लगाया जाएगा। उन्होंने जिला अर्थाटी से राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिये तथा परिवार वालों को भरोसा दिलाया कि मलबे के नीचे दबे लोगों को ढूंढने की कोशिश में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि विगत दिवस सीएम कैप्टन अमरेंद्र ङ्क्षसह ने घटना स्थल के दौरे के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि हादसे के संबंध में लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कडी कार्रवाई की जाएगी। यदि घटना के लिए मालिक जिममेदार पाया जाता है तो कानून मुताबिक पुरे नुकसान व राहत कार्यों के खर्च की भ्भरपाई फैक्टरी मालिक से वसूलने की सिफारिश की जाएगी। इससे पहले कमिश्नर ने डिप्टी कमिश्रर व डीसीपी से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। ---Morning Updae-- लुधियाना के सूफिया चौक के निकट प्लास्टिक उत्पाद फैक्ट्री में आग को 48 घंटे बीत चुके हैं। गौरतलब है कि सोमवार सुबह इस फैक्ट्री में आग के बाद अंदर पड़े कैमिकल के स्टॉक में ब्लास्ट के बाद इसकी इमारत ढह गई थी और कैमिकल के चलते आग अभी जारी है और मलबा हटाने के साथ आग की लपटें तेजी से बाहर निकल रही हैं। जिसके चलते बचाव कार्य में लगी एन डी आर एफ और जिला प्रशासन को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि मोके पर मौजूद दमकल विभाग की टीमें आग पर काबू पाने में जुटी हैं। सीनियर फायर अफसर बी एस संधू के मुताबिक अब तक 13 शव बरामद कियर जा चुके हैं और तीन कर्मी अभी भी मलबे तले दबे हुए हैं। जबकि दो लोगों को जिंदा बचा लिया गया था, जिनका सी एम सी अस्पताल में इलाज जारी है। उन्होंने कहा कि कैमिकल के चलते आग अभी लगी हुई है और राहत अभियान में दिक्कतें आ रही हैं। फैक्टरी में लगी आग को बुझाने आए दमकल कर्मियों का आरोप है कि उन्हें पहले बता दिया जात कि अंदर ज्वलनशील कैमिकल पड़ा है, तो शायद इतने लोगों व दमकल कर्मियों की जानें न जातीं। फैक्टरी का मालिक उन्हें दोबारा अंदर लेकर गया, जबकि वहां से सिर्फ धुआं निकल रहा था, आग बिल्कुल नहीं थी। वहीं पर, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से उन्हें वर्दी व अन्य साजो सामान नहीं मुहैया करवाया जा रहा। कच्चे कर्मचारियों को मात्र 9400 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है, जिसमें से ही वे अपने बूूट व वर्दियां लाते हैं और इन्हीं वर्दियों में उन्हें आग की तपश से गुजरना पड़ता है, जिसके चलते कुछ माह पहले दमकल विभाग के चार कर्मी एक हादसे में झुलस गए थे, जो आज तक अपनी डद्मूटी सही तरीके से कर पाने के लायक नहीं बने हैं। दमकल कर्मियों के मुताबिक उनसे 12 घंटे काम लिया जाता है और उन्हें कई बार छुट्टी भी नहीं मिलती ______________ A DAY BEFORE INPUT ---- मुखयमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने आज लुधियाना में आगजनी के बाद जमींदोज हुई पांच मंजिला बिल्डिंग से हुए बडे हादसे के स्थल का दौरा किया तथा मौके पर राहत कार्यों का जायजा लेते हुए रेस्कयू आपरेशन में जुटे अधिकारियों से घटना व मौजूदा हालात की पूरी जानकारी हासिल की। सीएम के साथ लोकल बाडी मिनिस्टर नवजोत सिंह सिद्धू, पंजाब कांग्रेस के प्रधान एवं एमपी सुनील जाखड भी थे। इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीएम अमरेंद्र ने घटना को बेहद अफसोस बताते हुए मृतकों के परिजनों के साथ गहरी सहानूभुति व्यक्त की तथा कहा कि इस आगजनी व हादसे के दौरान हमारे फायर अफसरों की भी जान गई है तथा इस हादसे में मारे गए लोगों को दस लाख रूपये मुआवजा दिया जाएगा। जिसमें पांच लाख रूपये पंजाब सरकार व पांच लाख रूपये लोकल बाडी मिनिस्टर नवजोत ङ्क्षसह सिद्धू अपने विभाग की ओर से देंगे। इसके अलावा मृतकों के आश्रितों को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। इस अवसर पर मुखयमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस घटना की जांच के आदेश दिये है तथा डिविजनल कमिश्नर इस हादसे के पीछे के कारणों के बारे में पूरी जांच करके उन्हें रिपोर्ट देंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने मौके पर राहत कार्य का जायजा लिया है तथा अभी कुछ और फायर मैन व अन्य के फंसे होने की सूचना है। वह उन सभी के सकुशल होने की कामना करते है। एक सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि स्थनीय सरकार विभाग के मिनिस्टर नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए पहले ही बडे स्तर पर कदम उठाए जा रहे है। इसके लिए जहां 97 फायर इंजन अलग अलग शहरों में दिये जा रहे है, जिसमें से 67 बांटे जा चुके है, तथा बाकी भ्भी जल्द बांट दिये जाएंगे। इसके अलावा ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अलग से फायर डायरेक्टोरेट स्थापित किया जा रहा है जिसका नोटिफिकेशन जल्द हो जाएगा। इस डायरेक्टोरेट के स्थापित होने के बाद बिल्डिंग निर्माण के सेफटी पहलुओं की जांच भी इसी के अधीन होगी तथा कोई भी निर्माण इनके बिना नहीं होगा। पूर्व में हुए निर्माणों को भी या तो सेफटी के नियम पालन करने होंगे अन्यथा उन्हें बिल्डिंग को बंद करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि डिविजन कमिश्नर की जांच रिपोर्ट आने के बाद और कोई भ्भी जरूरी कदम सरकार द्वारा उठाए जाएंगे।इस दौरान डिप्टी कमिशनर लुधियाना प्रदीप अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि 10-10 लाख रुपये की मुआवजा राशि व सरकारी नोकरी हादसे में मारे गये फॉयरमैनों के परिजन व आश्रितों को मिलेगी। हादसे में मरने वाले अन्य लोगों के परिजनों को सरकार की ओर से 2-2 लाख रूपये का मुआवजा दिया जायगा। इस दौरान हादसे में मारे जाने वालों का आंकडा 12 को छू गया है जोकि अभी और बढने की आशंका है। राहत कार्यों में जुटी सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस व प्रशासन की टीमों ने मलबे के नीचे से एक और शव निकाला, जिसकी पहचान फायर मैन कन्हैया के तौर पर हुई। मालूम रहे कि सूफियां चौक की प्लास्टिक व कैमिकल फैक्टरी में आगजनी के बाद हुए ब्लास्ट के बाद ध्वस्त हुई गिरी बिल्डिंग से देर रात तक 8 लोगों के मरने की सूचना थली जबकि बाकी शव आज सुबह निकाले गए। टीम ने 3 लोगों को 8 घंटे बाद जिंदा बचाकर अस्पताल में भर्ती करवा दिया है। अब तक मृतकों के नाम दलित नेता व निगम अधिकारी लक्ष्मण द्रविड, पंजाब टैक्सी यूनियन के प्रधान इंद्रपाल सिंह पाल, राजन, विशाल, संदीप, अमरजोत, बलदेव, धन बहादुर, शिमौन गिल, पूर्ण सिंह व कनैय्या बताये जा रहे है। अभी भी अंदर एक दर्जन के करीब लोगों के दबे होने की आशंका है। दबे हुए मलबे में फैक्ट्री से संबंधित लोग, फायर कर्मी और बचाव कार्य में जुटे लोग बताए जा रहे है। घायलों में रोहित व अन्य इलाज के लिए सीएमसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इससे पहले देर रात को मलबे के नीचे से निकाले गए फैक्टरी मालिक के ड्राइवर विक्की ने बताया कि वह आग लगने के बाद फायरमैनों के साथ पहली मंजिल पर फैक्टरी में बचाव कार्य में जुटा था कि अचानक फैक्टरी की पहली मंजिल में ब्लास्ट हो गया जिसके बाद वह बचने के लिए बाहर की ओर भ्भागने लगे तो एकदम से बिल्डिंग आ गिरी तथा वह अलमारी के नीचे फंस गया। मौके पर विक्की को तुरंत घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया है। यह भी पता चला है कि फायर कर्मी अधिकारी राजिंद्र शर्मा और वाल्मिकी समाज से जुड़े नगर निगम अधिकारी लक्ष्मण द्रविड़ के भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। जबकि मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल लाया गया है। घटना के बाद यह भी मालूम हुआ है कि बिल्डिंग जमींदोज होने के उपरांत मलबा 10 से 12 फुट ऊपर उठ चुका है और नीचे मानवीय ङ्क्षजदगीयां मौत से संघर्ष करने को मजबूर है। रात का अंधेरा होने के कारण बचाव कार्य में काफी दिक्कते आ रही है। हालांकि प्रशासन ने अपने स्तर पर बचाव कार्य को सुचारू रूप से चलाने की खातिर जरनेटरों के द्वारा रोशनी का प्रबंध किया है। इस दौरान पुलिस ने बताया कि इस संबंधी में फैक्टरी मालिक गोला पर धारा 304 ए के तहत मामला दर्ज लिया है। जानकारी के मुताबिक सुफिया बाग चौक में स्थित इस प्लास्टिक फैक्ट्री अमन सन्ज़ में लिफाफे बनाने का कार्य होता है। आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता तो बाद में ही चल पाएंगा किंतु फैक्ट्री के प्रबंधकों के अनुसार प्रथम दृष्टि में इस घटना का कारण बिजली का शार्ट सर्कट बताया जा रहा है। गनीमत यह रहा कि सुबह 8 बजे सर्दी होने के कारण फैक्ट्री कर्मचारी अभी कार्य के लिए पहुंचे नहीं थे वरना नुकसान अधिक हो जाता। मौके पर पहुंचे लुधियाना के जिलाधीश प्रदीप अग्रवाल व पुलिस कमिश्नर आरएन ढोके ने बताया कि मौके पर एनडीआरएफ व बीएसएफ और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ, बीएसएफ व जालंधर से पीएपी (पंजाब आर्म्ड फोर्स) की टीमें पहुंच चुकी हैं। आर्मी भी मौके पर आकर बचाव कार्य को अंजाम पर ले जाने के लिए डटी हुई है। मौके पर तत्काल पांच जेसीबी मशीनों और क्रेने को बुलाया गया। खबर लिखे जाने तक पूरी इमारत में ध्वस्त हुए मलबे में आग सुलग रही है, भयंकर मंजर में धुआं और गर्माहट के बीच राहत कार्यो में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार आज सुफीया चौक की इस फैक्टरी में आग लगने के 4 घंटे बाद पूरी 5 मंजिला बिल्डिंग उस वक्त धवस्त हो गई जब फायर कर्मी व अन्य लोग बचाव कार्य में जुटे हुए थे। सूत्रों के अनुासर इसके चलते गिरी इमारत में दर्जन से अधिक फायर कर्मी व आम लोग फंसने की आशंका है। जिससे मौके पर हाहाकार मच गया। बाहर खड़े फायर कर्मी अपने साथी कमियों को बचाने की कोशिशों में जुट गए है तथा आस पास के लोग भी उनका साथ दे रहे है। मौके पर राहत कार्य के दौरान एक व्यक्ति को घायल हालत में निकाला गया है तथा उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया है। फिलहाल बचाव कार्य के दौरान विभिन्न अस्पतालों की एम्बुलेंस और डाक्टरों की कई टीमें जिला प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में राहत कार्य में जुटी हुई है।

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