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भारत के प्रातों पर विशेष लेख

Nov1,2017 | BADEV RAJ/ AASA SINGH TALWANDI | Ludhiana

ब्रिटिश इंडिया राज्यकाल के समय भारत में गर्वनमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1870, 1915 व 1435 के अधीन प्रांत बनाए जाते थे। 1 नवंबर 1956 के तुरंत पहले पार्ट-ए,पार्ट-बी, पार्ट-सी थे। जनरल कलाज एक्ट 1897 के अनुसार पार्ट-ए स्टेट में आंधरा, आसाम, बिहार, बंबे, मध्य प्रदेश, मदरास, उड़ीसा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, वैस्ट बंगाल, पार्ट-बी स्टेट में हैदराबाद, जममू-कश्मीर, मध्य भारत मशूर, पैप्सू, राजस्थान, सौराष्ट्रा व टरावनकोर-कोदीन , पार्ट-सी स्टेट में अजमेर, भोपाल, कौओरग, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, कच्छ, मनीपुर, त्रिपुरा, विंधया प्रदेश दर्ज थे। भारत में 601 के लगभग प्रिंसली रियासतें थी। 15 बड़ी रियासते थी जैसे हैदराबाद, कश्मीर, मैसूर, ट्रावनकोर, बड़ौदा, गवालियर, इंदौर, कोचिन, जैपुर, जोधपुर, बीकानेर, भोपाल व पटियाला जो भारत के पहले गृह मंत्री लोह पुरष सरदार वल्भ भाई पटेल ने रियासतों को खत्म कर भारत में मिला दिया। पटेल जी की मौत 15 दिसंबर 1950 के बाद भारत में भाषा धर्म कितावाद, प्रांतवाद के आधार पर भूख हड़ताल मरन व्रत के अंदोलनों द्वारा प्रांतों के ऊपर प्रांत बनाए। जोकि संविधान की भावना के विरुध थे। सरदार वल्भ भाई पटेल जी ने अक्तूबर 1947 में पटियाला में अपने भाषण में कही था कि हमें खालिसतान, सिखस्तान, जटस्तान की मांग नहीं करनी चाहिए। यह भावना भारत को पाकिसतान में बदल देगी। मई 1950 में तरीविंदरम में अपने अपने भाषण में पटेल जी ने कहा कि आंधरा, तामिल व केरल में जो लोग भाषा के आधार पर प्रांतों की सिरजना करना चाहते है तो देख ले कि नार्थ में क्या असर होगा। आंधरा के बनाने संबंधी अपनी पार्टी के फैसले के विरुध भी डट कर बोले। पटेल जी ने कहा कि जो सरकार जातपात धर्म से ऊपर उठकर काम नहीं करते उसकों सत्ता में एक दिन भी रहने का अधिकार नहीं है। इसी तरह महाराजा रणजीत सिंह जी ने 12 मिसलों को खत्म करते शुक्रचक्कीया मिसले के साथ मिलाकर ऐकीकरन किया। जर्मन के इंम्पीरियल चांसलर लोह पुरुष बिसर्मक ने एक्ता कर फैडरल जर्मनी बनाई व उसके संविधान को 5 घंटों के भीतर लिखवाया जोकि 50 साल तक लागू रहा। बाद में एक्ता की खातिर बोन व बरलिन की दीवार बनाई गई। भारत के संविधान के पहले शडूयल के अनुसार अब 29 प्रांत व 7 यू.टी. है। जैसे कि पंजाब की रीआरगेनाईजेशन एक्ट 1966 (31 ऑप 1966) तारीख 01-11-1966 से पंजाब को नए तरीके से पंजाब और हरियाणा में बांटा गया। यह सिर्फ चौधर की भूख, मुखय मंत्रीयों के कुर्सी प्राप्त करने के लिए किया गया। बाग में भाषा बोल के आधारित, इलाके, राजधानी, पानी, नहरों हाईकोर्ट, चंडीगढ़ आदि के विवादों में फस के अंदोलनों के द्वारा हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, ट्रिब्यूनलों में केस लडक़र सरकारी खजाने में फजूल खर्च करना, रास्ता रोककर आवाजाई के साधनों में रोक ड़ालना, प्रातों के लोरों को आपस में लड़ाना, एक जाति के धर्म के मुख्य मंत्री बनाने, एक फिरके के लोगों की अजारेदारी की पकड़ कायम करनी, कम गिनती वर्ग के वोटरों जैसे कि विमुक्त जाति के लोगों को संविधानिक व डैमोकरेटिक हक्को से वंचित रखना, देश भक्तों की कुर्बानी, आजादी व संविधान के सैकुलर ढांचे के विरुध हैष विमुक्त जाति के 193 देश भक्त कबीले जिनकी भारत में 20 करोड़ के लगभग आबादी है देश की आजादी की खातिर 285 विमुक्त जाति के सांसी जाति के सदस्यों ने काला पानी में ऊमर कैद की सजाओं 82 साल लंबे अरसे तक जनम व जात के नाम पर जराइम पेशा एक्ट के अधीन स्पेशल जेलों में सजाएं, गांवों के गांव अगनी भेंट, फासीयों, देश की संस्कृति आजादी व स्वैमान के लिए दुख काटने के बाद आजादी के 70 सालों के बाद भी सरकार में भागेदारी न होने के कारन कभी भी अलग विमुक्त जाति स्थान की मांग नहीं की और न ही पंजाबी सूबा, तलागना, गौरखलैंड़, बोड़ोलैंड़ की तरह मांग की। माननीय प्रधान मंत्री नरिन्द्र मोदी जोकि देश विदेश में बहुत ताकतवर होकर सामने आए है। उनको निवेदन किया जाता है कि उक्त लोह पुरुषों लीडऱों, पटेल जी, महाराजा रणजीत सिंह व बिसर्मक के नक्शे कदमों पर चलते भारत के प्रांतों को अपील कर 5 जोन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम व सैंटर में बांटा जाए। बहुत सारे प्रांतों के आपस में झगड़े अपने आप खत्म हो जाएंगे व कम गिनती वर्ग विमुक्त जाति के वोटरों जिनकों अग्रेंज सरकार ने साजिश के अधीन 1924 के जराए पेशा एक्ट में अलग-अलग प्रांतों में बांट दिया था। अपने नुमाएंदे एम.एल.ए व एम.पी लोक सभा लई चुनकर बहुमत के साथ सकैटर्ड वोटा इक्ट्ठे होकर स्टेट असैबलीयों व पार्लीमेंट में भेजने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे। सरकारी खजाने में से कंसोलीडेटिड व कनटिनजिंड फंड के खर्च भी बहुत कम हो जाएंगे। -----लेखक - बलदेव राज (चीफ पैटरन, राष्ट्रीय लीगल, एडवाईजर), आल इंडिया विमुक्त जाति सेवक संघ - 99157-08955/ -आसा सिंह तलवंडी (पंजाब प्रधान), आल इंडिया विमुक्त जाति सेवक संघ - 98144-12500

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