- Date: 25 Jun, 2019(Tuesday)
Time:
 logo

पंजाब के सांसी शूरवीर महाराजा रणजीत सिंह जी के जन्म दिवस पर विशेष लेख

Oct30,2017 | AASA SINGH TALWADI (WRITER) | Ludhiana

महाराजा रणजीत सिंह जी का जन्म उनके पिता महां सिंह व माता माई मालवा की शादी 1775 में होने के 10 महीने बाद सर्दीयों की ठंड में 13 नवम्बर 1776 को कच्ची सराए गुजरांवाला में हुआ था। कई लेखक उनके जन्म की तारीख 2 नवम्बर 1980 लिखते है। सन् 1793 ई: को 17 साल की ऊमर में राज गद्दी पर बैठे सन् 1799 में लाहौर पर कब्जा करके महाराजा का रुतबा हासिल किया। सन् 1778 में कई सरदार व चीफ शुक्रचकिया मिशर में शामिल हो गए थे। सन् 1803 में श्री अमृतसर को फतेह कर महाराजा जी ने गुरु घर श्री हरिमंदिर साहिब शीश निभाया और भाई लैहणा सिंह मजीठिए को इंचार्ज बनाया। प्रसिद्ध इतिहासकार मेजर बरौड़ फुट सी.बी. लतीफ, ग्रिफिन पद्म श्री शेर सिंह शेर आदि लिखते है कि महाराजा रणजीत सिंह सांसी कबीले के वंश में से थे व राजा सांस मल (सांसी) की 17वां पीढ़ी के उत्तराधिकारी बीडू गोत्र के थे। महाराजा रणजीत सिंह के पूर्वज कालू, भट्टी जो गांव में पिंडी भट्टियाँ में रहते थे 3 पुशतों तक वहां पर रहे। 1470 में सांस मल के पुत्र बीडू, पोत्रे हरड़, पड़पौत्रे उदरत, पड़पौते के पुत्र सुंदर की औलाद थे जो अपने गांव मौजां पिंडी भट्टियाँ जो लाहौर से 40-50 कोस पश्चिम की तरफ स्थित था भटनार से आकर रहने लगे थे। पिंडी भट्टियाँ से उट कर राजा सांसी के नजदीक सैहसरी गांव जोकि अमृतसर से 5-6 कोस की दूरी पर स्थित था व सांसी कबीले का गढ़ था अपने भाईचाके में पतनी सहित आकर रहने लगे। सैहसरी व सैहसरां दोनों भाई बहन थे व इनके गांव का नाम भी इन्ही के नाम पर रखा गया था। राजा सांसी गांव का ना महाराजा जी के सांसी कबीले के नाम पर रखा गया था। अंतरराष्ट्रीय एयरपोट राजा सांसी का नाम एम्पीरियल गजट 1884-85 अमृतसर पंजाब गजट नोटीफिकेशन 1947 में दर्ज है। महाराजा रणजीत सिंह जी के पूर्वजों का वंश पीड़ी दर पीड़ी प्रफुलित होता गया। भाई बारा जी ने गुरु ग्रंथ साहिब पढऩा सीख लिया व गांव शुक्रचक्क में आधे गांव के मालिक थे। बुधा सांसी ने गुरु घर अमृतसर से 1692 ईसवी में अमृतपान कर बुध सिंह, सिख बन गया। बुध सिंह बहुत देलर था उसके शरीर पर तलवारों के 27 व चोटों के 9 निशान थे। पचास बार अपनी डब्बी घोड़ी पर जेहलम, चनाब, व रावी दरियाओं को पार कर अपना सिक्का जमाया। महाराजा रणजीत सिंह के परदादा नोध सिंह की शादी साल 1730 में गुलाब सिंह पुत्र बिसु सांसी की लडक़ी के साथ मजीठे में हुई जो बाद में मजीठे के मुखी कहलाने लग पड़े। महाराजा के दादा चड़त सिंह की शागी इलाके के चौधरी अमीर सिंह गुजरांवाला के बड़ी लडक़ी के साथ 1756 ईसवी में हुई। गुजरावाला व आसपास के बहुत से गांव सांसी कबीले के वसनीक थे कच्ची सराए गुजरांवाला हैडकुआटर था। गुजरावाला गजट अनुसार गुजरांवाला का पहला नाम खानपुर-सांसीया था। सरदार नोध सिंह के भाई चांद भान सिंह की औलाद जो संधावालीया गोत्र नाम के साथ जाने जाते थे राजा सांसी में महाराजा की जगीरों के मालिक है। कुछ इतिहासकार महाराजा रणजीत सिंह को जट सांसी लिखते है। फरदोशी के शाहनामा व अन्य इतिहासकार को पढऩे पर पता लगता है कि जाट का अर्थ जो जमीन का करता हो भले ही मुसलमान जाट (मिर्जा जाट), हिंदू जाट (कालू जाट) डोगर जाट, जाट सिख, व सांसी जाट हो। 1. महाराजा रणजीत सिंह के समय गांव होठीयां, थाना डसका (अब पाकिस्तान) में दो सांसीयां के हेम व टोटो के मंदिर थे। जिनके पिता का नाम सुनाकी थी प्रमात्मा की भक्ति में पक्के फकीर बन जिन में सांसीयों का विश्वास था गांव उोठीयाँ में मरे, वहीं उनकी कबरें बनाई। 2. गांव ततली खान कोमौकी गुजरांवाला में माई लक्खी सांसी कुआरी औरत थी की कब्र है जिसपर सांसी पूजा करते है। 3. बाबा मलंग शाह सांसी जाति के थे। जिनके पिता का नाम बिसु सांसी, वह गांव सरंकी, थावा ,संबरीयल में मरा, सांसी लोगों ने वहां उसकी कब्र बनाई व उसकी पूजा करते है। महाराजा रणजीत सिंह का राज बहुत शक्तिशाली, सात दरियाओं की धरती, सतलुज, ब्यास, रावी, जेहलम, चुनाब, सिंधू व अट्क सतलुज के दक्षिण-पूर्व से काबुल में उत्तक पश्चिम व लदाख् के उत्तर से सिंध में दक्षिण-पश्चिम की हदें जमरोद के किले से महाराजा रणजीत सिंह फिलौर तक फैला हुआ था। महाराजा ने 40-45 साल तक राज किया पर किसी को भी फांसी की सजा नहीं दी। राज दरबार में जात-पात धर्म-रंग, नसल के भेदभाव के बिना योगयता के आधार पर उच्च पदवीयों पर नौकरीयां दी। जैसे महाराज के 3 मुखय सलाहकार, मुसलमान बाई फकीर अजीजूदीन, विदेश मंत्री फकीर नर-उद-दीन, होम मिनिस्टर व फकीर अमाम-उद-दीन असला खाना के इंचार्ज थे। महाराजा रणजीत सिंह की हर मस्या व सक्रांति वाले दिन श्री हरिमंदिर साहिब अमृतसर में माथा टेकने आते थे व ऐकाग्रता के साथ बैठ बानी सुनते थे। गुरु व बानी के रास्ते पर चलते श्री हरिमंदिर साहिब में उन्होने सोने के पत्रे लगवाए। नजाम हैदराबाद की तरफ से बहुमुल्य हीरे जवाहरातों से जड़ी चांदनी गुरु घर के लिए भेंट की। श्री अकाल तखत साहिब से मिली सजा को अपने शरीर के कोटले खाकर खुशी से परवान किया। श्री हरिमंदिर साहिब में शाही लिबास में नहीं बलकि साधारण मनुष्य की भांति आते थेष गुलाब जलानी जगनामा में लिखते है कि महाराजा के लिए मुलतान का किला तोप के गोलों को बिना सर करना संभव था तोप का पहीया टूटने पर महाराज के सिपाही तोप के पहीयों की जगह अपने-अपने कंधें देते गए व शहीदी प्राप्त करते गए और किला सर कर लिया। महाराजा जी ने हारे हुए अफगान गर्वनर मोहम्मद खान, कसुर के नवाब कुतब-उद-दीन, मुलतान के गर्वनर के लडक़े को सनमान के साथ जीवन व्यतीत करने के लिए जगीरें दी। महाराजा ने काजीयाँ सजदां उलामा को रोब ऑफ आनर के साथ सम्मानित किया। हिंदूओं के धार्मिक शास्त्रों व मुस्लमानों के पवित्र कुरान का भी सनमान करते थे। नैपोलियन बोनापार्ट व मोहम्मद अली के भी प्रशंसक थे। उनके राज्य में 4 हजार स्कूल थे। जिन में बाहरी राबता रखने के लिए इंगलिश व फ्रांस पढ़ाई जाती थी। लेखक सजद वहीद-उद-दीन लिखते है कि महाराजा जी ने एक कैलीग्राफर की तरफ से पवित्र कुरान अपनी सारी जिंदगी की कमाई देश के मुसलमान के राज निजाम हैदराबाद को बेचने जा रहा था। एक बड़ी रकम 10 हजार रुपये सरकारी खजाने में से देकर लाया था और मुसलमान भाईचारे व पवित्र कुराने मजीद का सम्मान किया। शेरे पंजाब महाराजा रणजीत सिंह बहुत हा दलेर, गरीब नवाज, प्रतापी,सर्व-धर्म के हामी, साजी वालता, कुशल शासक व प्रशासक , दानी, माफ करने वाले, जन शक्ति, सेवा भावना के प्रतीक थे। उनका राज हलीमी राज, सेवा राज के नाम से जाना जाता था। महाराजा रणजीत सिंह जी का दिहांत 27 जून 1839 को हुआ। सांसी कबीले के लोग जो महाराजा रणजीत सिंह जी के असल वारिस थे चढ़ते पंजाब की सर जमीन पर अपनी पित्री हक्कों से वंचित है जो उतरते पंजाब व पाकिसतान के दूसरे प्रांतों में भी महफूज नहीं थे। पंजाब सरकार के मुख्य मंत्री स. कैप्टन अमरेन्द्र सिंह जी ने महाराजा सिंह जी की जीवनी पर किताब लिखी व उसके नक्शे कदम पर चलते हुए राज नहीं सेवा की भावना के अनुसार विमुक्त जाति के सांसी कबीलों के लिए पित्री हक्कों को मुखय रखते हुए बारत के संविधान के नीचे भलाई स्कीमों बनाने का पहल के आधार पर यतन करें। आसा सिंह तलवंडी, पंजाब प्रधान, आल इंडिया विमुक्त जाति सेवक संघ 98144-12500 (यह लेखक के निजी विचार है, हमारी न्यूज वेबसाइट का इससे सहमत होना जरूरी नहीं है)

पंजाब -के -सांसी -शूरवीर -महाराजा -रणजीत -सिंह -जी -के -जन्म -दिवस -पर -विशेष -लेख 1587


पंजाब -के -सांसी -शूरवीर -महाराजा -रणजीत -सिंह -जी -के -जन्म -दिवस -पर -विशेष -लेख
पंजाब के सांसी शूरवीर महाराजा रणजीत सिंह जी के जन्

Comments


-->

About Us


Jagrati Lahar is an English, Hindi and Punjabi language news paper as well as web portal. Since its launch, Jagrati Lahar has created a niche for itself for true and fast reporting among its readers in India.

Gautam Jalandhari (Editor)

Subscribe Us


Vists Counter

HITS : 6170722

Address


Jagrati Lahar
Jalandhar Bypass Chowk, G T Road (West), Ludhiana - 141008
Mobile: +91 161 5010161 Mobile: +91 81462 00161
Land Line: +91 161 5010161
Email: gautamk05@gmail.com, @: jagratilahar@gmail.com