- Date: 04 Mar, 2021 Thursday
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पुलिस की तत्काल कार्यवाही महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की प्राथमिक जांच के दौरान निभा सकती है अहम भूमिका: ए.डी.जी.पी. गुरप्रीत देओ

पीडि़त महिलाओं के लिए राहत गतिविधियों को और मज़बूत करने की वचनबद्धता के साथ राज्य स्तरीय प्रशिक्षण वर्कशॉप सम्पन्न

Feb22,2021 | Gurvinder Singh Mohali | Chandigarh

महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के मामलों को सभ्यक ढंग से निपटाने और पीडि़त महिलाओं को सहायता और सुरक्षा प्रदान करने के लिए पुलिस कर्मियों को जागरूक करते हुए ए.डी.जी.पी. कम्युनिटी अफ़ेयर्स डिवीजऩ और सार्वजनिक शिकायत श्रीमती गुरप्रीत देओ ने कहा कि महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के मामलों में पुलिस द्वारा की गई तत्काल कार्यवाही ऐसे मामलों को जल्द सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकती है। श्रीमती देओ सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘सखी वन स्टॉप सैंटर’ सम्बन्धी करवाई गई राज्य स्तरीय ऑनलाइन प्रशिक्षण वर्कशॉप के दूसरे चरण के दौरान संबोधन कर रहे थे। ‘हिंसा से प्रभावित महिलाओं के मामलों’ में कानून लागूकरण एजेंसियों की जवाबी प्रतिक्रिया विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि चाहे पंजाब पुलिस महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के पीडि़तों को राहत प्रदान करने के लिए तेज़ी से काम कर रही है परन्तु महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी के कारण हिंसा के बहुत से मामलों की रिपोर्ट ही नहीं की जाती। महिलाओं को उनके बुनियादी अधिकारों के प्रति जागरूक करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए ए.डी.जी.पी. ने स्पष्ट किया कि जिलों में ‘सखी वन स्टॉप सैंटरों’ को टोल फ्री महिला हेल्पलाइन नंबर -181 के साथ जोड़ा जा रहा है जिससे हिंसा से प्रभावित महिलाओं को आसानी के साथ इन सेंटरों में भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हर थाने में अलग महिला पुलिस डैस्क होना भी समय की माँग है। ‘महिलाओं के विरुद्ध शरीरिक और भावनात्मक हिंसा के मामलों से निपटने में पुलिस की भूमिका: भारत की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों से सीखना’ विषय पर बोलते हुए हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. के.पी. सिंह ने कहा कि हिंसा की शिकार महिलाओं को पुलिस की तरफ से दी भावनात्मक सहायता से उनमें न्याय की आशा बंधती है और हिंसा के विरुद्ध लडऩे की इच्छा-शक्ति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि प्रभावित महिलाओं में सुरक्षा की भावना कायम रखने के लिए महिला पुलिस मुलाजिमों की तैनाती करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। प्रशिक्षार्थीयों को हिंसा से प्रभावित महिलाओं की डॉक्टरी ज़रूरतों को उपयुक्त ढंग से पूरा करने के योग्य बनाने के लिए लोक नायक जयप्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमीनालॉजी एंड फोरेंसिक साईंस (गृह मंत्रालय) के सीनियर फेकल्टी डॉ. के.पी. कुशवाहा ने कहा कि वैज्ञानिक तरीकों द्वारा ही सबूत इकठ्ठा किये जाएँ जिससे दोषियों पर बनती कानूनी कार्यवाही करके पीडि़त को जल्द न्याय यकीनी बनाया जा सके। उन्होंने शरीरिक सोशण के मामलों की मैडीको-लीगल जांच के लिए फ़ार्मास्यूटीकल स्टाफ की तरफ से मंजूर और उत्तम तरीके अपनाने पर भी विचार किया। डा. मनमीत कौर, प्रोफ़ैसर, हैल्थ परमोशन, पी.जी.आई. स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ एंड प्रोफ़ैसोरियल फैलो, की जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हैल्थ, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स, आस्ट्रेलिया ने भी ‘स्वास्थ्य संभाल प्रणाली के अंतर्गत महिलाओं के विरुद्ध हिंसा का पता लगाना और हल सम्बन्धी विषय पर अपने विचार साझा किये। उन्होंने कहा कि महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के मामलों में स्वास्थ्य संभाल प्रणाली अक्सर अनदेखा परन्तु बहुत अहम पहलू है। डॉ. रीतइन्दर कोहली, पूर्व चेयरपर्सन, इंडियन वूमैन नैटवर्क, चंडीगढ़ ने सैशन ‘हिंसा पीडि़त महिलाओं के साथ सुखद संपर्क कैसे स्थापित किए जायें’ के दौरान प्रशिक्षार्थीयों को हिंसा से प्रभावित महिलाओं की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के ज़रूरी पहलूओं और गतिविधियों को समझने के लिए सुझाव दिए। महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्था (मैगसीपा), चंडीगढ़ की सहायक प्रोफ़ैसर डॉ. नयानिका सिंह ने कहा कि वन स्टॉप सखी सैंटर के स्टाफ की सबसे बड़ी जि़म्मेदारी हिंसा से पीडि़त महिला की मानसिक स्थिति को आम बनाने का यत्न करना है। उन्होंने शरीरिक और भावनात्मक हिंसा का शिकार महिलाओं को भावनात्मक ढंग से ठीक करने संबंधी बातचीत की, जो ऐसे मामलों को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए अहम साबित हो सकती है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती राजी पी. श्रीवास्तव ने कहा कि राज्य सरकार ने हिंसा से पीडि़त महिलाओं को सहायता प्रदान करने के लिए सभी 22 जिलों में ‘वन स्टॉप सखी सैंटर’ स्थापित किये हैं, जो समर्पित स्टाफ के साथ सफलतापूर्वक चल रहे हैं और जरूरतमंद महिलाओं को ज़रूरी सहायता प्रदान कर रहे हैं। विभाग के डायरैक्टर-कम-विशेष सचिव श्री विपुल उज्जवल ने कहा कि विभाग की तरफ से चलाए जा रहे यह सैंटर पीडि़तों को डॉक्टरी, कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने सहित एकीकृत सेवाओं तक पीडि़तों की पहुँच यकीनी बना रहे हैं। इस वर्कशाप के दौरान सवाल-जवाब सैशन करवाए गए और प्रशिक्षण ले रहे मुलाजिमों के सवालों के जवाब अंतरराष्ट्रीय स्तर के माहिरों द्वारा दिए गए। वर्कशॉप करवाने के लिए अहम योगदान देने वाले गवर्नेंस फैलो, डी.जी.आर. एंड पी.जी. श्रीमती प्रियंका चौधरी ने भी धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

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