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गीता जयंती में सात फुट के आयुष भल्ला बन रहे आकर्षण का केंद्र

हरियाणवी ताउ बन आयुष कर रहे लोगों का मनोरंजन

अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव में विशेष घोंसले लेकर पहुंचे है चंडीगढ़ से मामचंद

Dec10, 2018 / RAKESH SHARMA / KURUKASHTRA

कुरुक्षेत्र ,राकेश शर्मा ------------ गीता महोत्सव की रौनक में ब्रह्मसरोवर पर लगातार लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है। हजारों की संख्या में लोग गीता जयंती में पहुंचकर मनपसंद वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं। वहीं लजीज व्यंजनों का जायका भी लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। विभिन्न कलाकारों द्वारा जहां लोकनृत्यों तथा नुक्कड़ नाटकों से सभी का मनोरंजन हो रहा है वहीं यू.टी.जी. का कलाकार आयुष भल्ला भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सात फुट के कद वाले आयुष भल्ला गीता जयंती के दौरान ब्रह्मसरोवर पर हरियाणवी ताउ के रुप में नजर आ रहे हैं। हरियाणवी धोती-कुर्ता, पगड़ी, शाॅल और हाथ में लट्ठ लिए आयुष जब सरोवर पर सभी को राम-राम करते हुए घूमते हैं तो लोग फोटो खिंचवाने के लिए उनकी ओर दौड़ पड़ते हैं। केवल युवा ही नहीं बल्कि हर वर्ग के पर्यटक सेल्फी लेते दिखाई देते हैं। आयुष भल्ला शहर के न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप से पिछले एक वर्ष से जुड़े हैं तथा नाटक, नुक्कड़ नाटकों के साथ-साथ कईं फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा को दिखा चुके हैं। ---- कुरुक्षेत्र 9 दिसम्बर राकेश शर्मा पक्षी प्रेमी मामचंद का कहना है कि अगर हर व्यक्ति एक-एक घोंसला लगाए तो पक्षियों की कई प्रजातियों को बचाने में मदद की जा सकती है। इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव एक बड़ा मंच है। इसलिए इस महोत्सव के लिए पक्षियों के आशियाने घोंसला को विशेष तौर पर तैयार करके लाए है। अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव 2018 के क्राफ्ट मेले में चंड़ीगढ़ से पहुंचे मामचंद ने विशेष बातचीत करते हुए कहा कि महोत्सव में पिछले 3 सालों से पहुंच रहे है। पहले वे टेराकॉटा से बने समान को तैयार करने का काम करते थे, हालांकि इस बार भी मकान के अंदर की साज सज्जा करने के लिए टेराकॉटा से बने सुंदर-सुंदर कार्नर व अन्य समान लेकर आए है। लेकिन इस बार पर्यटकों के लिए पक्षियों के घोंसले विशेष तौर पर लेकर आए है। उन्होंने कहा कि बचपन से ही उनका वन्य प्राणियों खासकर पक्षियों के साथ खासा लगाव रहा है, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में देखते ही देखते पक्षियों की कई प्रजातियां लुप्त हो गई है। इसलिए मन में संकल्प लिया कि पक्षियों को बचाने का प्रयास किया जाए, इस लक्ष्य को जहन में रखते हुए उन्होंने पक्षियों के आशियाने घोंसले को बनाने शुरु किए। इस महोत्सव में छोटे और बड़े 2 साईज के घोंसले लेकर आए है जिनकी कीमत महज 100 और 150 रुपए रखी गई है। उन्होंने कहा कि महोत्सव में प्रत्येक व्यक्ति से आग्रह करेंगे कि पक्षियों से प्रेम करे और उनके लिए जो कुछ बन सकता है, वह करने का प्रयास करे।

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