- Date: 02 Apr, 2020 Thursday
Time:

परीक्षा पे चर्चा-'सिर्फ परीक्षा के अंक ही जिंदगी नहीं' :modi Sir

छात्रों और शिक्षकों से परीक्षा के तनाव को दूर करने पर संवाद : पीएम

कुल 2,000 स्टूडेंट्स और टीचर्स हिस्सा ले रहे

Jan20,2020 | Agency | New Delhi

पीएम नरेंद्र मोदी स्टूडेंट्स और उनके पैरंट्स की टेंशन दूर करने के लिए 'परीक्षा पे चर्चा' कर रहे हैं। पीएम ने पिछले साल भी छात्रों संग यह चर्चा की थी। दिल्ली के तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में हो रही इस चर्चा में छात्रों और शिक्षकों से परीक्षा के तनाव को दूर करने पर संवाद कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में कुल 2,000 स्टूडेंट्स और टीचर्स हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें से 1,050 छात्रों का चयन निबंध प्रतियोगिता के जरिए किया गया है।मोदी ने कहा, क्या कभी हमने सोचा है कि मूड ऑफ क्यों होता है? अपने कारण से या बाहर के किसी कारण से। अधिकतर आपने देखा होगा कि जब मूड ऑफ होता है, तो उसका कारण ज्यादातर बाह्य होते हैं। उन्होंने कहा, हम विफलताओं में भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं। हर प्रयास में हम उत्साह भर सकते हैं और किसी चीज में आप विफल हो गए तो उसका मतलब है कि अब आप सफलता की ओर चल पड़े हो। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘विफलता से डरना नहीं चाहिए और नाकामी को जीवन का हिस्सा मानना चाहिये।’’ उन्होंने छात्रों को चंद्रयान मिशन की घटना का जिक्र करते हुये छात्रों को बताया कि उनके कुछ सहयोगियों ने चंद्रयान मिशन की लैंडिंग के मौके पर नहीं जाने की सलाह दी थी, क्योंकि इस अभियान की सफलता की कोई गारंटी नहीं थी। मोदी ने कहा कि इसके बावजूद वह इसरो के मुख्यालय गये और वैज्ञानिकों के बीच में रहकर उनका भरपूर उत्साहवर्धन किया। मोदी ने कहा, सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है। ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। लेकिन यही सब कुछ है, ऐसा नहीं मानना चाहिए। मैं माता-पिता से भी आग्रह करूंगा कि बच्चों से ऐसी बातें न करें कि परीक्षा ही सब कुछ है। उन्होंने कहा, जाने अनजाने में हम लोग उस दिशा में चल पड़े हैं जिसमें सफलता-विफलता का मुख्य बिंदु कुछ विशेष परीक्षाओं के मार्क्स बन गए हैं। उसके कारण मन भी उस बात पर रहता है कि बाकी सब बाद में करूंगा, एक बार मार्क्स ले आऊं। हमें अपने बच्चों की क्षमता का अंदाजा होना चाहिए और उसी के अनुसार उनको प्रोत्साहित करना चाहिए। पैरेंट्स को लेकर उन्होंने कहा कि आपको यह सोचना चाहिए कि जब बच्चे छोटे थे तो आप कैसा बिहेव करते थे। छोटा बच्चा जब गिर जाता है तो मां ताली बजाती है और कहती है कि कोई बात नहीं। आपको उसके बड़े होने पर भी ऐसा ही बिहेव करना चाहिए। माता-पिता को बच्चों को मदद करने की अपनी मानसिकता हमेशा जिंदा रखनी चाहिए। अधिकार और कर्तव्यों को लेकर पूछे गए एक सवाल को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि दोनों अलग नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमारे कर्तव्यों में ही अधिकार भी समाहित हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को नागरिक के नाते कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। लाइन में रहना, बिजली की कम खपत करना और टिकट लेकर ही चलने जैसी चीजों के जरिए हम अपने कर्तव्य का निर्वहन कर सकते हैं।

Priksha-Pe-Charcha-2020-Pm-Narender-Modi- 175